जांच में पता चला कि फेसबुक पर पोस्ट अपलोड करने वाले बुजुर्ग को कुछ वर्ष पूर्व हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा हुई थी। कारावास के दौरान जेल में अच्छा आचरण करने पर वर्ष 2017 में बुजुर्ग को राज्यपाल की संस्तुति पर रिहा कर दिया गया था।
इधर, पुलिस पूछताछ में बुजुर्ग का कहना था कि उसने अनजाने में फेसबुक पर आई एक कथित भिंडरवाला की वीडियो और पोस्टर को शेयर कर दिया। बुजुर्ग के व्हाट्सएप ग्रुप की जांच पड़ताल में भी पुलिस को किसी और तरह का कोई सुराग न मिलने पर पुलिस ने बुजुर्ग का 81 पुलिस एक्ट के तहत चालान किया है।
बता दें कि एक माह पूर्व खटीमा में भी व्हाट्सएप पर 20-20 खालिस्तान रिफ्रेंडम नाम से ग्रुप चलाने वाले दो युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कई जांच एजेंसियों ने भी दोनों समर्थकों से पूछताछ की थी।
वर्ष 1984 में हुए सिख दंगों के बाद सिख समाज के लिए अलग राष्ट्र खालिस्तान बनाने की मांग उठी और पंजाब के जनरैल सिंह भिंडरवाला ने मुहिम चलाकर खालिस्तान ब्रिगेड की स्थापना की। कुछ समय बाद पुलिस मुठभेड़ में भिंडरवाला की मौत के बाद उसके समर्थकों ने 20-20 खालिस्तान रिफ्रेंडम के नाम से मुहिम छेड़ी। इसका मकसद वर्ष 2020 तक अलग राष्ट्र खालिस्तान बनवाना था। इसके बाद से देश भर में खालिस्तान मुहिम को लेकर अलर्ट जारी हुआ। पुलिस प्रशासन ने मुहिम चलाने वालों की धरपकड़ शुरू की। इसके चलते कुछ समर्थक विदेश भागने के बाद वहीं से सोशल मीडिया के जरिये खालिस्तानी विचारधारा को प्रचारित प्रसारित करते हैं।
फेसबुक पर शहर के एक बुजुर्ग की ओर से खालिस्तान समर्थक भिंडरवाला का पोस्टर और वीडियो अपलोड किया गया था। जांच में पता चला है कि बुजुर्ग ने गलती से किसी और की पोस्ट को शेयर किया था। इस आधार पर बुजुर्ग का पुलिस एक्ट में चालान कर भविष्य में उन्हें इस तरह के पोस्ट ना डालने की चेतावनी दी गई है।
- डॉ. सदानंद दाते एसएसपी, यूएसनगर