पौड़ी जिले में सतपुली और चौबट्टाखाल तहसीलें प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रही हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के चलते ग्रामीणों को अपने कार्य के लिए भटकना पड़ रहा है।
एक अधिकारी के पास दो-दो तहसीलों का चार्ज होने के कारण लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए तहसीलों के चक्कर काटना पड़ता है। सतपुली तहसील में एसडीएम का पद ही सृजित नहीं है। वर्ष 2006 में तहसील के अस्तित्व में आने के बाद से ही लैंसडौन एसडीएम के पास यहां का चार्ज रहता है।
यहां के तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार का जिम्मा भी नायब तहसीलदार लैंसडौन के पास है। दो राजस्व निरीक्षकों में से एक ही राजस्व निरीक्षक तैनात है, जबकि दूसरे निरीक्षक का अतिरिक्त दायित्व एक राजस्व उपनिरीक्षक संभाल रहे हैं। तहसील में राजस्व उपनिरीक्षकों की स्थिति तो और भी खराब है। 17 पटवारी सर्किलों का चार्ज महज आठ राजस्व उपनिरीक्षकों के हवाले है।
प्रत्येक उपनिरीक्षक दो सर्किलों का जिम्मा संभाले हैं, जबकि एक पटवारी के पास तो तीन पटवारी सर्किलों की जिम्मेदारी है। तहसील में टाइपिस्ट एवं लिपिक के पद भी रिक्त चल रहे हैं। इसका असर तहसील के कामकाज पर पड़ रहा है।
उधर, चौबट्टाखाल तहसील में भी कमोवेश यही हाल है।
यहां एसडीएम का पद तो सृजित है, लेकिन चार्ज एसडीएम पौड़ी के पास है। तहसीलदार का प्रभार नायब तहसीलदार संभाले हुए हैं, जबकि दोनों राजस्व निरीक्षकों का प्रभार उपनिरीक्षकों के हवाले है। 20 पटवारी सर्किलों वाले चौबट्टाखाल तहसील में महज छह राजस्व उपनिरीक्षक ही तैनात हैं। एक पटवारी चार-चार सर्किलों का काम संभाले हुए है।
एकेश्वर की ब्लाक प्रमुख सुधा नेगी, पोखड़ा के ब्लाक प्रमुख सुरेंद्र सिंह रावत, भाजपा मंडल महामंत्री नीरज पांथरी, पोखड़ा के पूर्व प्रमुख सोबन सिंह व गडरी के प्रधान महिपाल सिंह का कहना है कि दोनों तहसीलों में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी का मामला नई सरकार के संज्ञान में लाया जा रहा है।