महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना(मनरेगा) में मजदूरी का बिल समय पर न भेजना अफसरों को भारी पड़ा। ऐसे लापरवाह अधिकारियों से विभाग ने 16.28 लाख रुपये की राशि वसूल की है।
इसमें ग्राम्य विकास अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता और खंड विकास अधिकारी शामिल हैं। जो मनरेगा मजदूरी का बिल भेजने को अधिकृत हैं। ग्राम्य विकास विभाग की ओर से सभी जनपदों को निर्धारित समयावधि के भीतर बिल भेजने के लिए सख्त निर्देश दिए गए। बिलिंग कार्य में उधमसिंह नगर सबसे टॉप पर है। जबकि हरिद्वार जनपद की स्थिति बेहद खराब है।
राज्य में मनरेगा योजना में काम करने वाले जॉब कार्ड धारक की मजदूरी का भुगतान समय पर न होने से ग्राम्य विकास विभाग सख्त कार्रवाई कर रहा है। बिल देरी से भेजने वाले अफसरों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
वर्ष 2016-17 में मजदूरी बिल भेजने में देरी करने वाले अफसरों से 16.28 लाख रुपये की राशि पेनल्टी के रूप में वसूली गई। मनरेगा में प्रावधान है कि काम पूरा होने पर पंद्रह दिनों के भीतर जमा करना अनिवार्य है।
ऐसा न करने पर संबंधित अधिकारी को .05 प्रतिशत के हिसाब से विलंब भुगतान वसूला जाता है। इसके बावजूद भी कई अफसर इसमें लेटलतीफी कर रहे हैं। जिस कारण मजदूरों को पेमेंट देरी से मिल रही है। प्रदेश में करीब 72 करोड़ रुपये बकाया मजदूरी का भुगतान करना बाकी है।