साहब ने ज्वाइन करते ही वसूली की फाइल देखनी शुरू की। गठ्ठर से वह एक-एक फाइल निकालते और बड़बड़ाने लगते और फाइल दूसरी तरफ पटक देते।
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मातहत परेशान थे कि फाइलों में साहब को क्या दिखाई पड़ता है कि पारा चढ़ता जा रहा। जब आखिरी फाइल भी उन्होंने पटक दी तो एक मातहत ने पूछ लिया कि क्या है साहब?
साहब भुनभुनाए कि लोकल में यही तो है, एक के खिलाफ भी जुर्माना नहीं लगा।