पिछले दिनों राज्य में आई दैवी आपदा में लापता हुए लोगों की संख्या अब और घट गई है। सुबह तक जहां मिसिंग सेल की रिपोर्ट के आधार पर कुल लापता लोगों की संख्या 924 बताई जाती रही।
वहीं शाम को मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने यह संख्या 823 बताई। इससे आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों को लेकर निशाने पर आई सरकार की कार्य प्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब तक 38 करोड़ रुपये बांटे जा चुके
देर शाम सचिवालय में प्रेस कांफ्रेंस कर मुख्य सचिव ने राहत कार्यों का ब्योरा सार्वजनिक करते हुए बताया कि 743 लापता लोगों के परिजनों को अब तक 38 करोड़ रुपये की राहत राशि बांटी जा चुकी है।328 लोगों का दाह संस्कार किया गया जिसमें से 132 की शिनाख्त हुई है।
मुख्य सचिव ने बताया कि आपदा से विकलांग हुए 87 में से 73 को राहत राशि बांटी गई है। आपदा से ध्वस्त हुए 1275 पक्के भवनों में से 1230 और आंशिक क्षति वाले 4131 में से 3501 का मुआवजा बांटा जा चुका है। इसी तरह ध्वस्त हुए 484 कच्चे मकानों में से 470 का और आंशिक नुकसान वाले 651 कच्चे मकानों में से लगभग सभी का मुआवजा पीड़ितों को बांटा जा चुका है।
नुकसान का भी मुआवजा
बताया कि एनसीएफ के मानकों में राज्य सरकार की ओर से बढ़ाई गई राशि के साथ घराट, बड़े-छोटे जानवर, छोटे व्यवसायियों के प्रतिष्ठान, दुकान, किराएदारों समेत खेत को हुए नुकसान का भी मुआवजा बांटा जा रहा है। बताया कि पुनर्निर्माण एवं पुनर्वास के कार्यों में भी तेजी लाई जा रही है। केंद्र सरकार को नुकसान और पुनर्निर्माण के प्लान भेजे जा चुके हैं। डीपीआर बन रही हैं।
खबर पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें