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मॉल का कूड़ा बीनने में दिख रही 'मलाई'

Fri, 02 Aug 2013 02:18 PM IST
देहरादून/अंकित चौधरी
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राजधानी के लोग घर के बाहर सड़ते कूड़े से परेशान होते हों तो हों, कूड़ा उठान का जिम्मा संभाल रही कंपनी दून वैली वेस्ट मैनेजमेंट (डीवीडब्लूएम) के कर्मचारियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
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गली-मोहल्लों में दौड़ने और घर-घर आवाज लगाने की ‘मेहनत’ के बाद हर महीने हर घर से मिलने वाले 20 से 40 रुपये से कहीं ज्यादा उन्हें कामर्शियल भवनों से प्रतिमाह मिलने वाली न्यूनतम एक हजार रुपये की रकम ज्यादा भाने लगी है।

यही वजह है कि वार्डों से तमाम शिकायतों के बावजूद कंपनी की गाड़ियां मोहल्लों का रुख नहीं कर रहीं, जबकि होटल, मॉल, रेस्टोरेंट से कूड़ा उठाने के लिए उसके कर्मचारी हर सुबह तय वक्त पर पहुंच जाते हैं। खास बात यह है कि पूरी जानकारी होने के बावजूद नगर निगम भी कंपनी पर कार्रवाई करने के मामले में आंखें मूंदे बैठा है।
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यह है तय रकम
घरों से कूड़ा उठान के लिए तीन स्लैब तय हैं। निमभन आय वर्ग से 20 रुपये, मध्य आय वर्ग से 30 और उच्च आय वर्ग परिवार से 40 रुपये प्रतिमाह लिए जाते हैं। वहीं, कामर्शियल के रेट कूड़े की मात्रा के हिसाब से तय किए जाते हैं।

होटलों से न्यूनतम एक हजार रुपये लिए जाते हैं। शहर में 200 से अधिक होटल, मॉल, रेस्टोरेंट हैं। इनमें से कई से तो तीन से पांच हजार रुपये प्रतिमाह तक की आय कंपनी को होती है।

इन क्षेत्रों में है दिक्कत
नगर निगम के कई क्षेत्रों में कूड़ा नहीं उठाया जा रहा। इनमें ब्रह्मपुरी, कैनाल रोड, अधोईवाला, डोभालवाला, नेशविला रोड, टर्नर रोड, चकराता रोड आदि क्षेत्र शामिल हैं।

दिक्कत बताओ, रोना शुरू
कूड़ा उठान को लेकर निगम को जब भी दिक्कत बताई जाती है, वह कर्मचारियों की कमी का रोना रोने लगता है। निगम प्रशासन के मुताबिक नगर पालिका के वक्त जनसंख्या और शहर का दायरा कम था, लेकिन तब यहां दस सफाई इंस्पेक्टर तैनात थे।

नगर निगम बनने के बाद आबादी और क्षेत्रफल बढ़ा, इसके बावजूद महज एक इंस्पेक्टर से काम चलाना पड़ रहा है।

इनकी भी सुनिए
घरों से कूड़ा न उठाए जाने की लगातार शिकायतें आ रही हैं। ऐसी समस्याओं पर नियंत्रण के लिए मानीटरिंग कमेटी का गठन कर लिया गया है। कमेटी कंपनी के काम पर पूरी नजर रखेगी।
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-अशोक कुमार, मुख्य नगर अधिकारी
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