स्मार्ट सिटी की ओर कदम बढ़ा रही राजधानी गिरासू दरख्तों के साये में है। ऐसे ही एक दरख्त ने शुक्रवार देर रात जूनियर टेलीकाम अधिकारी प्रियंका गुप्ता की जान ले ली। बूढे़ दरख्त के कारण दून में यह पहला हादसा नहीं हुआ है। शहर के कई इलाकों में ऐसे तमाम पेड़ हैं, जो कब धराशायी हो जाएं कहा नहीं जा सकता। सवाल यह है कि लोगों की जान के लिए खतरा बन चुके इन पेड़ों को आखिर काटा क्यों नहीं जाता? जवाब में अधिकारी बस एक दूसरे के सिर ठीकरा फोड़कर पल्ला झाड़ लेते हैं।
बल्लूपुर से लेकर सेलाकुई, राजपुर रोड, हरिद्वार रोड, सहस्रधारा रोड ऐसे क्षेत्र हैं, जहां सड़कों के किनारे ऐसे पेड़ हैं, जो ‘बूढे़े’ हो चुके हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं जो पूरे खोखले हो चुके हैं। यह पेड़ ऐसे हैं जिन्हें काटना या हटाना जरूरी है लेकिन नियमों की सख्ती और पेड़ काटने के विरोधी कुछ एनजीओ की वजह से इन्हें हटाने में कोई रुचि नहीं लेता है। जिस कारण यह पेड़ किसी के लिए कब जानलेवा बन जाएं, कहा नहीं जा सकता है।
शुक्र वार देर शाम चकराता रोड पर आईएमए के पास पेड़ गिरने के कारण जो हादसा हुआ है, वह पेड़ गिरने से पहला हादसा नहीं हुआ है, बल्कि इससे पहले भी ऐसे हादसे हो चुके हैं। राजपुर रोड पर वर्ष 2012 में मैराथन के दौरान सूखा पेड़ गिरने से एक स्कूली छात्र की मौत हो गई थी। इसके अलावा कई लोग बाल-बाल बचे थे। ऐसे पेड़ों के गिरने से कई लोग घायल हो चुके हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार विभाग इन पेड़ों को हटाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। इस संबंध में कई बार स्थानीय लोग वन विभाग, जिलाधिकारी के साथ ही मुख्यमंत्री तक शिकायत कर चुके हैं।
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नियम तय फिर भी नहीं होता पालन
खतरनाक पेड़ों को बाकायदा परिभाषित किया गया है। शासन की ओर से इसके लिए शासनादेश भी जारी किया जा चुका है। जिसमें ऐसे पेड़ जो पूर्ण रूप से सूख चुके हों। जिनका ऊपरी भाग सूख चुका हो। जो पेड़ किसी संक्रामक रोग से ग्रसित हों। जो पेड़ बृजपात से प्रभावित हो। जिसकी जड़ें सतह से ऊपर दिखने लगी हों। जिसका एक भाग पूर्ण रूप से सूख चुका हो। जिसकी जड़ें निर्माण कार्य के दौरान कट गई हों। जो पेड़ भवन की ओर झुका हो। जो खोखला हो गया हो। जो किसी बिजली के लाइन की ओर झुका हो उसे खतरनाक पेड़ माना गया है। ऐसे पेड़ों को काटने में कोई मनाही नहीं है।
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वन विभाग तुरंत देता है अनुमति
वन विभाग के अनुसार खतरनाक पेड़ों के साथ ही जो पेड़ ज्यादा पुराने हो गए हैं, उन्हें काटने की अगर किसी विभाग, संस्थान या व्यक्ति की ओर से अनुमति मांगी जाती है तो पेड़ का निरीक्षण कर उन्हें तत्काल अनुमति दे दी जाती है। डीएफओ राजीव धीमान ने कहा कि वन विभाग पेड़ों को खुद नहीं काट सकता है। रोड पर जितने भी पेड़ हैं वह लोनिवि की संपत्ति पर है। अगर लोनिवि ऐसे पेड़ों को कटाने की अनुमति मांगता है तो उसे एनओसी दी जाएगी।
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पेड़ों के काटने में एनजीओ भी बनते हैं बाधा
खतरनाक हो चुके सड़क किनारे खड़े पेड़ों को हटाने में काफी हद तक कुछ प्रकृति प्रेमी एनजीओ भी बाधा बने हुए हैं। जैसे ही वन विभाग या कोई अन्य ऐसे पेड़ों को काटने की बात करता है तो यह एनजीओ पर्यावरण की दुहाई देकर कार्रवाई रोक देते हैं। लिहाजा कोई भी जिम्मेदार खुद इसके लिए आगे नहीं आता है।
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खतरनाक पेड़ होंगे चिह्नित
शुक्रवार को हुए हादसे में महिला अधिकारी की मौत के बाद पुलिस विभाग हरकत में आ गया है। एसपी सिटी श्वेता चौबे ने कहा कि इस हादसे में एक बेकसूर की जान गई है। उन्होंने वन विभाग, लोनिवि सहित अन्य विभागों को पत्र लिखकर इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सड़क किनारे खड़े ऐसे पेड़ों को चिह्नित करने को कहा है। कहा कि सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी समझे। जिसके कि इस प्रकार के हादसों पर रोक लग सके।
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शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
बल्लुपुर चौक से लेकर प्रेमनगर तक दर्जनों पेड़ ऐसे हैं जो खोखले हो चुके हैं और यह कभी भी गिर सकते हैं। प्रेमनगर निवासी एडवोकेट गुरुमीत सिंह लक्की ने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी, वन विभाग सहित समाधान पोर्टल के माध्यम से मुख्यमंत्री को भी कई बार शिकायत की गई लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने ऐसे पेड़ों को तुरंत काटने की मांग की है।
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कोट्स...
बीमार पेड़ की पहचान करने के लिए एफआरआई के पास तकनीक है। जिसे होलेनस डिटेटक्शन तकनीक कहा जाता है। इसके माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि पेड़ अंदर से खोखला है या नहीं। इसके साथ ही बीमारी का पता भी लगाया जा सकता है। जिसके बाद पेड़ का ट्रीटमेंट भी किया जा सकता है।
- डॉ. अमित पांडे, वैज्ञानिक एफआरआई
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सड़कों के किनारे खड़े खतरनाक पेड़ों का जल्द ही चिह्निनीकरण किया जाएगा। इसके बाद रिपोर्ट तैयार कर इन्हें काटने के लिए हटाने की कार्रवाई की जाएगी। जिससे भविष्य में खतरनाक पेड़ों से कोई हादसा न हो।
- डॉ. आशीष श्रीवास्तव, डीएम
जीएमएस रोड में कुछ तरह सड़क के किनारे लगे पेड़ दे रहे है दुर्घटनाओं को आंमत्रण
रिलांयस के पास लगा पेड़ जो दुकान के ऊपर से आ रहा है,ये कभी-भी बड़ी घटना का कारण बन सकता है ।
जीएमएस रोड पर सड़क के किनारे लगा पेड जो बिजली के तारों के बीच से निकल रहा है, जो कभी -भी बड़ी दुर्घटन
पटेल नगर में लगा ये पेड़ जो सड़क की ओर तिरछा हो गया है, जो दुर्घटना को दे रहा है निमंत्रण ।
सहारनपुर रोड स्थित मंडी के पास लगा ये सूखा पेड़ कभी-भी गिर सकता है ।
सहारनपुर रोड स्थित मंडी के पास लगा ये सूखा पेड़ कभी-भी गिर सकता है ।