महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह बताती हैं कि वे पूर्वजों की सदियों से स्थापित परंपरा का निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने अपनी आने वाली पीढ़ी को भी इस धार्मिक कार्य करने की सीख दी है। वह बताती हैं कि टिहरी राजदरबार से जुड़ीं भविष्य की पीढ़ी भी बदरीनाथ मंदिर से जुड़ीं परंपराओं को निभाने के लिए तैयार है। खास तौर से इस आयोजन के लिए आई माला राज्यलक्ष्मी शाह की नातिनी का कहना है कि स्कूली शिक्षा और परीक्षा के कारण वो नहीं आ पाती थी, लेकिन अब यहां आकर इसमें शामिल होती रहेंगी।
बदरीनाथ नहीं गई पर 35 साल से गाडू घड़ा अनुष्ठान में हो रहीं शामिल
गाडू घड़ा के लिए तिलों का तेल पिरोने के लिए जो सुहागिन महिलाएं पहुंची हैं, वो कई पीढि़यों से इस परंपरा को निभा रही हैं। सरिता जोशी बताती हैं कि वो 35 साल से इस अनुष्ठान में शामिल हो रहीं हैं। इससे पहले उनकी सास परंपरा को निभाती थीं। हालांकि वो अभी तक बदरीनाथ धाम नहीं गईं हैं, लेकिन भगवान के निमित जो तेल निकाला जाता है, उसमें शामिल होकर ही भगवान की सेवा का हिस्सा बन जाती हूं। क्षमा शर्मा का कहना है कि वे गत 25 साल से इस अनुष्ठान में शामिल हो रही हैं। इसी सेवा का प्रतिफल होगा कि मैं गत वर्ष भगवान के दर्शन कर पाईं।