माय सिटी रिपोर्टर देहरादून वाहन स्वामियों को गाड़ियों को सरेंडर करने के लिए अब आरटीओ में अधिकारियों, कर्मचारियों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। कारण कि अब गाड़ियों के सरेंडर की ऑनलाइन व्यवस्था लागू की जा रही है। मुख्यालय के निर्देश पर एनआईसी की ओर से सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। जिसके जरिए कोई भी वाहन स्वामी अब गाड़ियों को ऑनलाइन सरेंडर कर सकेगा। ऑनलाइन के लिए वाहन स्वामी न सिर्फ गाड़ियों के कागजात वरन फीस भी जमा कर सकेंगे। बता दें कि कोरोना वायरस संकट के चलते पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में व्यावसायिक वाहन स्वामी गाड़ियों को सरेंडर कर रहे हैं । कारोबार नहीं होने से वाहन स्वामी गाड़ियों को सरेंडर करने के साथ ही ना सिर्फ रोड टैक्स वरन इंश्योरेंस की भी बचत करना चाह रहे हैं। लेकिन गाड़ियों को सरेंडर करने के लिए वाहन स्वामियों को विभागीय अधिकारियों कर्मचारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। तमाम आरटीओ में अधिकारियों, कर्मचारियों के ना रहने की स्थिति में वाहन स्वामियों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन अब आरटीओ में ऑनलाइन गाड़ियों के ऑनलाइन सरेंडर की व्यवस्था की जा रही है। पिछले दिनों मुख्यालय में हुई बैठक के दौरान हल्द्वानी और देहरादून के आरटीओ ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। आखिरकार मुख्यालय ने एनआईसी से ऑनलाइन के जरिए गाड़ियों के सरेंडर करने की व्यवस्था की बात कही है। आरटीओ डीसी पठाई का कहना है कि जल्द ही गाड़ियों के आनलाइन सरेंडर की व्यवस्था लागू हो जाएगी । ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन स्वामियों को गाड़ियों को सरेंडर करने के लिए दस्तावेजों के साथ आरटीओ के चक्कर नहीं काटने होंगे। आंकड़ों पर नजर डालें तो कोरोना संकट के चलते कुमाऊं क्षेत्र में जहां 10 हजार से अधिक वाहन स्वामी गाड़ियों को सरेंडर करना चाह रहे हैं, वहीं गढ़वाल क्षेत्र में भी ऐसे वाहन स्वामियों की संख्या पांच हजार से अधिक है। पिछले दिनों उत्तराखंड परिवहन महासंघ की बैठक के दौरान भी वाहन स्वामियों ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। वाहन स्वामियों की शिकायत थी कि गाड़ियों के ऑनलाइन सरेंडर की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।