20 साल पहले उनकी बस्ती में पानी और सीवर की सुविधा भी नहीं थी। सभी बस्ती वाले सरकारी स्टैंड पोस्ट से ही पीने और नहाने धोने के लिए पानी भरा करते थे। एसडीएम को सौंपे शिकायती पत्र में जगदीश ने कहा कि वह मेहनत मजदूरी कर किसी तरह अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। आठ हजार रुपये देने की स्थिति में वह और उसका परिवार नहीं है।
उधर, जल संस्थान के एई बीआर चौधरी ने कहा कि मामला संज्ञान में आ चुका है। हाल ही में विभाग की ओर से पांच हजार रुपये से अधिक के बकायेदारों को नोटिस जारी किए गए हैं। मामले की जांच कराकर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।