राजपुर रोड स्थित होटल में हुई कार्यशाला
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। राज्य में स्थायी जैविक प्रदूषकों की अध्ययन, जांच के काम में नार्वे सहयोग करेगा। इसको लेकर एक कार्यशाला का आयोजन राजपुर रोड स्थित एक कार्यशाला में किया गया।
पीसीबी के डॉ. अंकुर शर्मा ने कहा कि ठोस अपशिष्ट, प्लास्टिक के कचरे को खुले में जलाने, औद्योगिक इकाइयों से उत्सर्जन, जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट का सही से निस्तारण न होने से डाइऑक्सिन फ्यूरान जैसे अत्यंत विषैले जैविक प्रदूषक उत्पन्न होते हैं जो कि मिट्टी, जल में काफी समय तक मौजूद रहते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक होते हैं। अब इनके अध्ययन, पहचान के काम नार्वे का सहयोग मिल सकेगा। काउंसलर एंड्रियास स्केई ने कहा कि जैविक प्रदूषक एक वैश्विक चुनौती है, जिसका समाधान अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वैज्ञानिक अध्ययन और मजबूत नीतिगत ढांचे के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि नॉर्वे सरकार हिमालयी क्षेत्रों की पारिस्थितिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के साथ दीर्घकालिक सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। पीसीबी के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखंड पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है तथा यहां से निकलने वाली गंगा, यमुना नदियां देश के विशाल भू-भाग को जल उपलब्ध कराती हैं। अतः स्थायी जैविक प्रदूषकों की प्रभावी निगरानी और नियंत्रण राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैज्ञानिक अध्ययन और निगरानी का एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। इस दौरान विशेषज्ञ सतीश सिन्हा, पीयूष महापात्रा, डॉ. कृति आदि मौजूद थे।