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Haridwar: गैर हिंदुओं का प्रवेश निषेध, रील बनाना भी पूरी तरह वर्जित...हरकी पैड़ी पर जगह-जगह लगा दिए गए बोर्ड

Sat, 17 Jan 2026 10:21 AM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार

सार

हरिद्वार हरकी पैड़ी पर गैर हिंदुओं का प्रवेश निषेध किया गया है। इस संबंध में यहां जगह-जगह कुछ बोर्ड लगाए गए हैं।
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हरिद्वार में लगे बोर्ड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तीर्थ की मर्यादा बनाए रखने के लिए श्रीगंगा सभा ने हर की पैड़ी समेत कई घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश को निषेध कर दिया। इस बारे में शुक्रवार को विभिन्न जगहों पर बैनर व बोर्ड लगा दिए गए हैं। श्रीगंगा सभा ने ब्रिटिश हुकूमत में लागू म्यूनिसपल एक्ट के तहत यह कदम उठाया है। बोर्ड में स्पष्ट रूप से चेतावनी लिखी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

हरकी पैड़ी समेत मालवीय द्वीप व अन्य घाटों पर लगे इन बैनरों की शुक्रवार को लोगों को चर्चा रही। इसमें श्रीगंगा सभा ने स्पष्ट तौर पर लिख दिया कि घाटों पर किसी तरह से फिल्मी गीत पर वीडियो या रील्स बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यदि किसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इस तरह के वीडियो प्रसारित होते दिखे तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी। मामले को लेकर प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। वहीं व्यापारी से लेकर आमजन इसे सनातन की रक्षा में उठाया गया कदम बता रहे हैं।

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बोर्ड लगाने का उद्देश्य है कि बीते दिनों हुई घटनाओं को लेकर अब सजग रहना होगा। सभी को समझना होगा कि तीर्थ की मर्यादा क्या है और यहां आने से पहले किन नियमों का अनुपालन करना है। सनातन धर्म के साथ हो रहे खिलवाड़ को अभी पूरी दुनिया ने देखा है इसके संरक्षण की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। - नितिन गौतम, अध्यक्ष, श्रीगंगा सभा

 

 

 

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महामना ने किया था श्रीगंगा सभा का गठन

महामना मदन मोहन मालवीय ने गंगा नदी के अविरल धारा को बनाए रखने के लिए सन् 1916 में तीर्थ पुरोहितों और महंतों के साथ मिलकर श्रीगंगा सभा का गठन किया था। उन्होंने अंग्रेजों के बनाए जा रहे बांधों और बाधाओं से गंगा के पवित्र स्वरूप को बचाने की दिशा में यह कदम उठाया था। वह इसमें कामयाब भी हुए जिससे आज तक गंगा की धारा अविरल बह रही है।

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अंग्रेजों ने माना था सबसे पवित्र स्थान

हरिद्वार शहर को अंग्रेजों ने भी पवित्र और हिंदू सनातन संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण माना था। उन्होंने न केवल अपने शासन काल में इसे म्यूनिसिपल का दर्जा दिया, बल्कि एक्ट बनाकर बायलॉज में लिख दिया कि इस क्षेत्र के तीन किलोमीटर के दायरे में न तो मांस मदिरा का कोई सेवन कर सकता है न ही बिक्री होगी।
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