महामना ने किया था श्रीगंगा सभा का गठन
महामना मदन मोहन मालवीय ने गंगा नदी के अविरल धारा को बनाए रखने के लिए सन् 1916 में तीर्थ पुरोहितों और महंतों के साथ मिलकर श्रीगंगा सभा का गठन किया था। उन्होंने अंग्रेजों के बनाए जा रहे बांधों और बाधाओं से गंगा के पवित्र स्वरूप को बचाने की दिशा में यह कदम उठाया था। वह इसमें कामयाब भी हुए जिससे आज तक गंगा की धारा अविरल बह रही है।
अंग्रेजों ने माना था सबसे पवित्र स्थान
हरिद्वार शहर को अंग्रेजों ने भी पवित्र और हिंदू सनातन संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण माना था। उन्होंने न केवल अपने शासन काल में इसे म्यूनिसिपल का दर्जा दिया, बल्कि एक्ट बनाकर बायलॉज में लिख दिया कि इस क्षेत्र के तीन किलोमीटर के दायरे में न तो मांस मदिरा का कोई सेवन कर सकता है न ही बिक्री होगी।