दस साल पहले विधानसभा घेराव के दौरान हुए बवाल के मामले में पेश न होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विवेक श्रीवास्तव ने कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत समेत चार के खिलाफ सोमवार को गैर जमानती वारंट जारी कर दिए। इसी मामले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय कोर्ट में पेश हुए।
कांग्रेस ने 2009 में तत्कालीन भाजपा सरकार के खिलाफ विधानसभा का घेराव किया था। इसी दौरान जाम लगने और पत्थरबाजी होने पर कांग्रेस के 25 नेताओं के खिलाफ नेहरू कालोनी में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में सुनवाई के दौरान 20 आरोपियाें के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं जबकि कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत (अब भाजपा में), किशोर उपाध्याय, सतपाल ब्रहमचारी, विनोद रावत और शंकर सिंह रमोला के पेश न होने के कारण इनकी पत्रावली अलग कर दी गई थी।
सोमवार को सुनवाई के दौरान किशोर उपाध्याय और प्रीतम सिंह कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने अन्य आरोपियाें के पेश न होने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने मंत्री हरक सिंह रावत, सतपाल ब्रहमचारी, विनोद रावत और शंकर सिंह रमोला के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए।