त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान बच्चों की शर्त पर असमंजस कायम है, लेकिन नामजदगी का पर्चा भरने का रास्ता फिलहाल सबके लिए खुला है। राज्य निर्वाचन आयोग इस बात से आश्वस्त है कि नामांकन भरने से लेकर जांच प्रक्रिया तक के लिए अभी पर्याप्त वक्त उसके पास है। यानी सारी स्थिति साफ होने के लिए वक्त की कोई कमी नहीं है। इन स्थितियों में उसने वेट एंड वॉच की नीति पर चलना मुनासिब समझा है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने यह जरूर किया है कि जिलों की सरकारी मशीनरी को हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में बच्चों की शर्त के संबंध में नए सिरे से निर्देश जारी कर दिए हैं। आयोग ने ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्यों के नामांकन में 25 जुलाई 2019 से पहले तीन बच्चों वालों को भी पात्र बताया है। क्षेत्र और जिला पंचायत को लेकर अलग से कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। आयोग ने पंचायती राज विभाग को पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए भी कहा है।
इस बार का पंचायत चुनाव कई वजहों से अजीबोगरीब स्थिति से गुजर रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य के पदों पर बच्चों की शर्त को लेकर कोई संशय नहीं रह गया है। 25 जुलाई 2019 के बाद दो बच्चे वाले ही चुनाव लड़ पाएंगे, लेकिन इस तारीख से पहले दो बच्चों की शर्त नहीं रहेगी। इन स्थितियों के बीच, क्षेत्र और जिला पंचायत सदस्य के पदों के लिए क्या व्यवस्था रहेगी, यह अलग से रेखांकित नहीं है। इसके अब अलग अलग निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। कुछ लोग इसकी व्याख्या त्रिस्तरीय पंचायत के सभी फार्मेट ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत में एक साथ लागू होने के रूप में कर रहे हैं, तो कइयों का कहना है कि इसके लिए अलग से व्यवस्था रेखांकित किए जाने की जरूरत है।
इन सबसे अलग राज्य निर्वाचन आयोग की स्थिति है। नामांकन प्रक्रिया अभी 24 सितंबर तक चलनी है। इसके बाद, 25 से 27 सितंबर तक नामांकन पत्रों की जांच का कार्य होना है। ऐसे में नामांकन पत्रों को स्वीकार या खारिज करने के लिहाज से निर्वाचन से जुड़ी मशीनरी के पास अभी पर्याप्त समय है। एक अफसर के मुताबिक, नामांकन करने से किसी को नहीं रोका जा सकता। असल बात नामांकन पत्र को स्वीकार करने या खारिज करने से जुड़ी है। किसी के भी दो बच्चे हैं या ज्यादा है, वह नामांकन करने के लिए तो स्वतंत्र है। नामांकन पत्रों की जांच के लिए तय आखिरी दिन तक का समय मौजूद है। इस वक्त तक जैसी स्थिति बनेगी, उस हिसाब से फैसला किया जाएगा।
...मगर दावेदारों का तो हर पल उलझन में
बच्चों की शर्त और पंचायत चुनाव में दावेदारी का मसला इतना उलझा हुआ है कि दावेदारों का एक-एक पल उलझन में गुजर रहा है। इन स्थितियों के बीच, तमाम दावेदारों के चेहरे पर बच्चों की शर्त पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद रौनक लौटी है, लेकिन वह पूरी तरह से आश्वस्त हो जाना चाहते हैं। ऐसे में उन्होंने नामांकन प्रक्रिया का हिस्सा बनने का तो निर्णय ले ही लिया है। दूसरी तरफ, तमाम दावेदार अब भी असमंजस में हैं।