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...तो क्या प्रचंड बहुमत में भी होगा एंग्लो इंडियन का मनोनयन

Sat, 18 Mar 2017 02:10 PM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : file photo
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प्रदेश में सरकार बनाने जा रही भाजपा विधानसभा में आंग्ल-भारतीय (एंग्लो इंडियन) समुदाय के प्रतिनिधि का मनोनयन करेगी? यह प्रश्न इसलिए उठ रहा है क्योंकि चुनाव में उसे प्रचंड बहुमत मिला है। संविधान में एंग्लो इंडियन समुदाय को प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से मनोनयन की व्यवस्था है। लेकिन, संविधान में यह प्रावधान वर्ष 2020 तक ही है। बता दें कि प्रदेश में इस व्यवस्था का इस्तेमाल सत्ता का संतुलन साधने के उद्देश्य से ही ज्यादा हुआ है।  
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पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी की सरकार के समय से आंग्ल भारतीय को प्रतिनिधित्व देने की परंपरा चली आ रही है। वर्ष 2002 में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत तो मिला था। मगर उसका संख्या बल 36 के जादुई आंकडे पर सिमट गया था। विधानसभा में संख्या बल को बढ़ाने के लिए तत्कालीन सरकार ने आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि के मनोनयन किया। दरअसल, संविधान में आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि को भी निर्वाचित सदस्यों की तरह सदन में वोट देने का अधिकार दिया गया है। 

वर्ष 2007 में भाजपा सत्तारुढ़ हुई तो वह बहुमत के आंकड़े से दो अंक दूर थी। 34 की संख्या को जादुई आंकड़े में बदलने के लिए यूकेडी व निर्दलीय सदस्यों का साथ लेने के अलावा आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि का मनोनयन किया गया। वर्ष 2012 में कांग्रेस 32 सीटों पर अटकी तो उसने एक बार फिर आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि को मनोनीत किया।
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मगर इस बार विधानसभा चुनाव में आए नतीजे पिछले सभी चुनावों से एकदम भिन्न है। भाजपा 57 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। बहुमत के मामले में वह सर्वाधिक सहज स्थितियों में हैं। इन हालातों में यह प्रश्न मौजू है कि वह आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि का मनोनयन करेगी? 
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कब कौन रहा सदस्य

- फोटो : file photo
सभी सुविधाएं अनुमन्य
विधानसभा में मनोनीत आंग्ल भारतीय समुदाय के का प्रतिनिधि को वो सारी सरकारी सुविधाएं अनुमन्य हैं, जो निर्वाचित सदस्य की दी जाती है। लोक सभा व राज्य सभा के चुनाव के अलावा उसे सदन में वोट देने का भी अधिकार है। उसे विधायक निधि भी मिलती है। पेंशन की सुविधा भी है।

संविधान में 70 वर्ष की व्यवस्था 
भारत का संविधान के अनुच्छेद 333 में राज्यों की विधानसभाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व के अनुच्छेद 170 में प्रावधान है कि यदि राज्य के राज्यपाल की यह राय है कि उस राज्य की विधानसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधित्व आवश्यक है और उसमें उसका प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है तो वह उस विधानसभा में उस समुदाय का एक सदस्य नाम निर्देशित कर सकेगा।

अनुच्छेद 334 के अंतर्गत यह व्यवस्था 60 वर्ष के लिए थी, जिसे 2009 में संशोधन कर 10 साल के लिए बढ़ा दिया गया था। 2020 में 70 वर्ष पूरे हो जाएंगे। यदि संविधान में कोई संशोधन नहीं होता है तो आंग्ल भारतीय समुदाय के मनोनय की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। लेकिन यदि सरकार ने मनोनयन कर दिया तो ऐसा सदस्य प्रावधान खत्म होने के बावजूद अपना कार्यकाल पूरा करेगा।

वर्ष      -मनोनीत सदस्य
2002-2007 -रसल वेलनटाइन गार्डनर
2007-2012- कैरन मेयर
2012-2017- रसल वेलनटाइन गार्डनर 
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