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फीस एक्ट को ‘धार’ देने को कोई नहीं तैयार

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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निजी स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने के लिए तैयार किए जा रहे फीस एक्ट को ‘धार’ देने में अभिभावकों ने कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। सरकार ने एक्ट को बेहतर बनाने के लिए लोगों से सुझाव मांगे थे, ताकि वह अधिक धारदार बन सके, लेकिन चुनिंदा लोगों ने ही सुझाव दिए। इनमें ज्यादातर सुझाव सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने ही दिए हैं।
शिक्षा विभाग ने फीस एक्ट पर सुझाव देने के लिए 19 जून को मेल आईडी जारी की थी। साथ ही निदेशालय स्थित शिकायत एवं सुझाव प्रकोष्ठ में लिखित एवं डाक से सुझाव भेजने का विकल्प के साथ 15 दिन का समय भी दिया, लेकिन अभिभावक और तमाम संगठनों ने सुझाव देने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। शिकायत एवं सुझाव प्रकोष्ठ में अंतिम तिथि तक करीब 30 सुझाव दर्ज किए गए। इनमें ज्यादातर सामान्य प्रकृति के हैं। निजी स्कूलों की मनमानी और फीस पर नियंत्रण के लिए चार-छह ठोस सुझाव नहीं आए हैं। सरकारी शिक्षकों को छोड़कर केवल आठ अभिभावकों के सुझाव आए हैं।
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ये सुझाव आए
-निजी स्कूलों की फीस सरकार तय करे। किसी भी स्कूल को खुद फीस तय करने की छूट न मिले।
-सालाना फीस बढ़ोतरी पर रोक लगे। सरकार सुविधाओं के अनुसार न्यूनतम फीस बढ़ोतरी करे।
-गर्मियों की छुट्टियों की फीस व यातायात का पैसा न लिया जाए।
-सरकारी स्कूलों की दशा सुधारी जाए। निजी विद्यालयों में भी किताबें सरकार छपवाकर उपलब्ध कराए।
-किसी निर्धारित दुकान या विद्यालय से किताबें, ड्रेस व अन्य सामान खरीदने पर पूरी तरह रोक लगे।
-शिक्षकों व कर्मियों की योग्यता निर्धारित हो, उसी के अनुसार स्कूलों की फीस तय की जाए।
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प्राप्त सुझावों को देखा जा रहा है। उनके आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इन सुझावों के आधार पर तैयार रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी ताकि एक्ट के ड्राफ्ट में उनके अनुसार संशोधन किया जा सके।
-भूपेंद्र सिंह नेगी, नोडल अफसर
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