कैलाश सत्यार्थी को शांति नोबेल पुरस्कार से नवाजे जाने पर उत्तराखंड में जन संघर्षों से जुड़े लोग भी बेहद खुश हैं। कैलाश सत्यार्थी का उत्तराखंड और अल्मोड़ा से गहरा नाता रहा है।
उन्होंने नशा नहीं, रोजगार दो और वन बचाओ आंदोलन में भी हिस्सा लिया। उत्तराखंड राज्य और अन्य मुद्दों को लेकर उत्तराखंड जन संघर्ष वाहिनी द्वारा 1988 में हिमालयन कार रैली के विरोध में वह खुद भी शामिल हुए और उन्हें दिल्ली में गिरफ्तार किया गया।
कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार मिलने की खबर मिलने पर उत्तराखंड में जन संघर्षों से जुड़े तमाम लोगों की यादें ताजा हो गईं। उत्तराखंड लोक वाहिनी के अध्यक्ष डा. शमशेर सिंह बिष्ट बताते हैं कि वन बचाओ आंदोलन के दौरान सत्यार्थी 1982 में अल्मोड़ा आए और उन्होंने कई जगह सभाओं में हिस्सा भी लिया। इसके अलावा, ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ आंदोलन को भी उनका समर्थन मिलता रहा।
उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी द्वारा राज्य निर्माण और अन्य मांगों को लेकर जब हिमालयन कार रैली रोकी गई थी, तब कैलाश सत्यार्थी ने हरिपाल, राजेश जोशी आदि के साथ कार रैली शुरू होने पर दिल्ली में जोरदार विरोध किया था। वह अन्य साथियों के साथ सड़क पर लेट गए थे।