केदारनाथ दर्शन करके लौट रहे तीर्थ यात्रियों का बायोमेट्रिक्स रजिस्ट्रेशन और वेरीफिकेशन नहीं हो रहा है। सोनप्रयाग चेक पोस्ट पर सिर्फ केदारनाथ जाने वाले वाले श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन और वेरीफिकेशन हो रहा है। जिससे सोनप्रयाग से ऊपर पड़ावों में श्रद्धालुओं की सही संख्या और लोकेशन की जानकारी नहीं मिल पा रही है।
पिछले वर्ष तक यात्राकाल में चार धाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों का रिकार्ड रखने की कोई व्यवस्था नहीं थी। केदारनाथ पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या भी श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अनुमान से बताती रही है।
आपदा के बाद शुरू हुई व्यवस्था
तीर्थयात्रियों का रिकार्ड न होने के कारण पिछले वर्ष जल प्रलय के बाद यात्रियों की संख्या को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं हो पाया था। इसका नतीजा यह रहा कि केदारनाथ जल प्रलय में कितने लोग मरे या कितने यात्री यहां थे, इसकी सटीक जानकारी नहीं मिल पाई।
दोबारा ऐसी स्थिति न बने इसके लिए शासन की तरफ से हरिद्वार जिले के नारसन से लेकर केदारनाथ तक विभिन्न स्थानों में बायोमेट्रिक्स पंजीकरण और सत्यापन काउंटर खोले गए हैं।
पटरी से उतरी व्यवस्था
पंजीकरण और सत्यापन का मकसद विभिन्न पड़ावों में यात्रियों की संख्या और लोकेशन की जानकारी रखना है। लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।
केदारनाथ जाते समय गुप्तकाशी, सोनप्रयाग या केदारनाथ मंदिर से पहले श्रद्धालु का रजिस्ट्रेशन और वेरीफिकेशन हो रहा है। लेकिन जब श्रद्धालु दर्शन कर वापस लौट रहा है, तो सोनप्रयाग में चेक आउट करते हुए वेरीफिकेशन नहीं हो रहा है।
जिसके चलते यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि कौन यात्री किस वक्त पर कहां था और दर्शन कर वापस कब लौटा।
अधिकारियों का है कहना
केदारनाथ पहुंचने पर श्रद्धालुओं को काउंटर पर अवगत कराया जाता है कि लौटने पर सोनप्रयाग में वेरीफिकेशन करवा ले। लेकिन श्रद्धालु सीधे निकल जाते हैं।
-सीमा नौटियाल, जिला पर्यटन विकास अधिकारी रुद्रप्रयाग