आपदा की मार झेल चुके केदारनाथ को अब अगले 50 वर्षों तक कोई खतरा नहीं है। केदारनाथ में 16/17 जून 2013 की तबाही की वजह बने चोराबाड़ी ताल से आगामी 50 से अधिक वर्षों तक केदारनाथ मंदिर, केदारपुरी और केदारघाटी को कोई खतरा नहीं है।
केदारनाथ मंदिर से चार किमी की दूरी पर स्थित ताल में पानी का बहाव बहुत कम हो चुका है। वहीं, काफी बड़े क्षेत्र में मुहाना क्षतिग्रस्त होने से यह क्षेत्र मिनी मैदान में तब्दील हो चुका है। वाडिया संस्थान के वैज्ञानिक पूरे क्षेत्र पर नजर रखे हुए हैं।
समुद्रतल से 12582 फीट की ऊंचाई पर स्थित चोराबाड़ी ताल इन दिनों अधिकांश सूखा पड़ा है। यहां चारों तरफ रेतीली मिट्टी बिखरी हुई है और अन्य क्षेत्र में सूखी घास है। ग्लेशियर से जो पानी निकल रहा है उसका बहाव भी कम हो चुका है और पानी सीधे मंदाकिनी नदी में मिल रहा है।