उत्तराखंड पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर चुके लक्ष्य गुप्ता का कहना है कि प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते सड़क हादसों रोकने के लिए प्रथम वर्ष के दौरान ही दिमाग में डिवाइस तैयार करने का आइडिया आया। कंप्यूटर विजन टेक्नोलॉजी से स्लिप डिटेक्टर डिवाइस बनाने में कामयाबी मिली।
इस डिवाइस का व्यापक स्तर पर प्रोडक्शन करना बिना बजट के संभव नहीं था। स्टार्ट अप के लिए इस आइडिया को अमबियो टेक्नोलॉजी कंपनी के नाम से पंजीकरण किया। इसे स्टार्ट अप में मान्यता मिल गई है। यह डिवाइस गाड़ी के स्टेयरिंग के साथ लगेगा। इसकी कीमत दो हजार रुपये तक होगी। वाहन चलाते समय यदि चालक को नींद या झपकी आ जाए या चालक काफी देर सामने न देख कर दूसरी तरफ देखता है तो इस डिवाइस अलार्म से अलर्ट करेगा। लक्ष्य के मुताबिक 30 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं चालक को नींद आने के कारण हो रही है।
स्नेल के व्यावसायिक उत्पादन से मिलेगा रोजगार
उत्तराखंड पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी के अश्विन अग्रवाल ने स्नेल (घेंगा) के उत्पादन का प्रोजेक्ट तैयार किया है। अश्विन ने सबसे पहले प्रदेश 500 लोगों पर सर्वे किया। इसमें यह पता लगाया कि लोग स्नेल का मांस खाने में प्रयोग कर सकते हैं या नहीं। इसमें 18 प्रतिशत मांसाहारी और 12 प्रतिशत शाकाहारी लोग ही स्नेल खाने के लिए तैयार हुए। इस पर अश्विन ने अपना आइडिया बदल कर स्नेल का व्यावसायिक उत्पादन करने का फोकस किया। अश्विन का कहना है कि उत्तराखंड की मौसम स्नेल के लिए अच्छा है। स्नेल के मांस से पोल्ट्री फीड बनाया जाएगा। इस फीड से मुर्गियों में अंडा देने की क्षमता बढ़ती है। पोल्ट्री फार्म में अंडा उत्पादन बढ़ाने के लिए यह कारगर फीड होगा। मशीन से स्नेल का लार एकत्रित किया जाएगा। 50 मिलीग्राम लार की दो हजार रुपये तक कीमत है। कोरिया में इसकी काफी डिमांड है। स्नेल के कवज में कैल्शियम कार्बोनेट अधिक होने से सड़क निर्माण व अन्य कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा।
काउंसिल के माध्यम से चयनित स्टार्ट अप को ‘ए’ श्रेणी के जिलों में व्यवसाय स्थापित करने के लिए मासिक भत्ता मिलेगा। इसमें सामान्य वर्ग को 10 हजार, एससी, एसटी, महिला, दिव्यांग वर्ग को 15 हजार (प्रति स्टार्ट अप) मासिक भत्ता एक साल तक दिया जाएगा।
इसके साथ ही नए उत्पाद की मार्केटिंग के लिए सामान्य वर्ग के स्टार्ट अप को पांच लाख और एससी, एसटी व महिला वर्ग को 7.5 लाख तक की सहायता सरकार देगी। एमएसएमई नीति के अनुसार स्टांप ड्यूटी में छूट भी मिलेगी। स्टार्ट अप उद्यमी की ओर से प्रदेश के भीतर ही माल की आपूर्ति करने पर एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति की जाएगी। मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटरों को तीन साल की अवधि तक संचालन एवं प्रबंधन खर्च के रूप में दो लाख प्रति वर्ष दिया जाएगा। स्टार्ट अप पॉलिसी अधिसूचना जारी होने के सात साल तक लागू रहेगी।
स्टार्ट अप के लिए ये हैं शर्ते
नीति में एक इकाई को स्टार्ट अप माना जाएगा। पंजीकरण की तिथि से सात वर्ष की अवधि वाली फर्म, संस्था या कंपनी स्टार्ट अप के लिए पात्र होगी। जैव प्रौद्योगिकी सेक्टर के लिए यह अवधि पंजीकरण तिथि से 10 वर्ष तक होगी। सालाना टर्नओवर 25 करोड़ से अधिक नहीं होना चाहिए। पहले मौजूद किसी व्यवसाय के विभाजन या पुनर्निर्माण के माध्यम से बनाई गई फर्म या संस्था को स्टार्ट अप नहीं माना जाएगा।