उत्तराखंड के राजकीय वाहन चालकों को अब कॉमर्शियल लाइसेंस के लिए रिफ्रेशर कोर्स नहीं करना पड़ेगा।
राजकीय वाहन चालक महासंघ की मांग पर सरकार ने मोटर अधिनियम में संशोधन किया है। प्रदेश में विभिन्न विभागों, निगमों और निकायों में तैनात करीब छह हजार चालकों को इसका लाभ मिलेगा। अपर परिवहन आयुक्त सुनीता सिंह ने इस संबंध में प्रदेश के सभी आरटीओ और एआरटीओ को संशोधन का अनुपालन करने को आदेश जारी किया है।
2011 में सरकार ने मोटर एक्ट में संशोधन कर कॉमर्शियल लाइसेंस के लिए दो दिन का रिफ्रेशर कोर्स अनिवार्य किया था। राजकीय वाहन चालक महासंघ के प्रांतीय महामंत्री पंकज भंडारी ने बताया कि महासंघ ने इसके विरोध में आंदोलन कर इसकी बाध्यता खत्म करने की मांग की थी।
29 अप्रैल 2016 को एक्ट में संशोधन में भी छूट नहीं दी गई। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री से वार्ता की। अब सरकार ने एक्ट के नियम 12 के उपनियम 6 में संशोधन कर राजकीय वाहन चालकों को छूट दे दी है।
यह आती थी दिक्कत
अधिकतर राजकीय चालक सचिवालय, निदेशालयों और विभागीय अफसरों के वाहन काफी समय से चला रहे हैं। महासंघ का कहना था कि इसलिए उन्हें रिफ्रेशर कोर्स करने की आवश्यकता नहीं है। कोर्स करने में चालकों का दो दिन का समय खराब होता था। इससे सरकारी कार्य में भी व्यवधान होता था।
मुख्यालय से इस संबंध में पत्र मिला है। एनआईसी से साफ्टवेयर में इसकी व्यवस्था करने को कहा गया है। राजकीय वाहन चालकों को कॉमर्शियल लाइसेंस बनवाने और रिन्यू कराने के लिए विभागीय पत्र लाना होगा।
- सुधांशु गर्ग, आरटीओ