राजधानी देहरादून में एक गर्भवती महिला सड़क पर तड़पती मिली। उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था।
बदहवासी के आलम में दर्द से कराहती महिला कुछ बड़बड़ा रही थी। लोग उसे देखते और चले जाते। इत्तिफाक से वहां से गुजरी समाधान हेल्पलाइन की संवासिनियों ने उसे देखा। कपड़े पहनाकर उसे दून महिला चिकित्सालय में भर्ती करा दिया गया है। आज मनोरोग विशेषज्ञ उसकी जांच करेंगे।
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शुक्रवार सुबह साढे़ ग्यारह बजे जाखन में अंजली डेयरी के पास सड़क किनारे एक गर्भवती महिला पड़ी तड़प रही थी। वहां से गुजर रही समाधान हेल्पलाइन की संवासिनी सीमा चौधरी, नंदिनी शर्मा और पुष्पा ने महिला से नाम पूछा तो वह ठीक से बता नहीं सकी।
संवासिनियों का कहना है कि हालत देख अंदेशा है कि खुद पर हुए जुल्मोसितम का असर उसके जेहन पर पड़ा है। वह बदहवासी में है। वह अपना पता तक भूल गई है। यह पूछने पर कि उसके कपड़े कहां हैं? बोली-‘दरिंदे मेरे कपड़े नोंच डालते हैं, इसलिए कपड़े नहीं पहनती। (चुटहिल हाथ दिखाते हुए बोली) लड़के और आदमी मारते हैं। भीख खाती हूं।’
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महिला पीड़ा से तड़पती रही और लगता था जैसे मन ही मन बड़बड़ा रही हो। उसे दून महिला चिकित्सालय के लेबर रूम में भरती किया गया। डॉक्टरों और नर्सों के सवाल पूछते ही वह उग्र हो जाती। डॉ. निधि रावत ने बताया कि उसे नींद की दवा देकर सुला दिया गया है। महिला की स्थिति देखकर लोग तरह-तरह की अटकलें लगाते रहे।
दून महिला चिकित्सालय की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि मनोरोग विशेषज्ञ को कॉल भेज दी गई है। वह शनिवार सुबह उसकी जांच करेंगे। अभी तक डिलेवरी नहीं कराई गई है। उसकी स्थिति स्थिर करने की डॉक्टर कोशिश कर रही हैं। जैसी हालत होगी, उसी आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
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