राजकीय मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध चिकित्सालयों में अब दवाइयों, एंबुलेंस के संचालन, एमआरआई और सीटी स्कैन आदि कामों के लिए बार-बार बजट के लिए शासन की ओर नहीं ताकना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग ने यूजर चार्ज का आधा हिस्सा संबंधित मेडिकल कॉलेजों को आवश्यकतानुसार खर्च करने की छूट दे दी है। इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया है।
राज्य के मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पताल यूजर चार्ज के रूप में होने वाली सौ फीसदी आय को कोषागार में जमा करते हैं। इसके बाद शासन स्तर से इन्हें खर्चों के हिसाब से भुगतान किया जाता है। इधर बीते दो साल से इन चिकित्सालयों में दवाइयों, एंबुलेंस और जनरेटर के डीजल, ऑक्सीजन आदि के मदों में बजट उपलब्ध न होने के चलते कामकाज प्रभावित है। कुल मिलाकर स्वास्थ्य सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। इस दिक्कत को देखते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर की ओर से बीते वर्ष पांच मई को शासन को पत्र लिखकर आवश्यक सेवाओं के मद में यूजर चार्ज को खर्च करने का अधिकार देने की मांग की गई थी।
इस मामले में अब जाकर फैसला हो सका है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह तय किया गया है कि मेडिकल कॉलेजों की ओर से कोषागार में जमा किए जाने वाले यूजर चार्ज का पचास फीसदी हिस्सा ही जमा किया जाएगा। शेष राशि को उपयोग आकस्मिक मद में किया जाएगा। इसके लिए प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में गठित समिति अधिकृत होगी। मेडिकल कॉलेज एक नया खाता खोलकर उसमें पैसा जमा करेंगे। खाते का संचालन संबंधित मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और वित्त नियंत्रक के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा।
इन चार मदों में होगा खर्च
- संबंधित चिकित्सालय के प्रयोग में आने वाली एंबुलेंस और जेनरेटर के डीजल के लिए
- औषधि एवं रसायन के अतिरिक्त ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए
- एमआरआई, सीटी स्कैन और एक्स-रे की फिल्म के लिए
- अत्यधिक आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयों की आपूर्ति के मद में
शासन करेगा मॉनिटरिंग
यूजर चार्ज को खर्च करने के लिए जिन मदों को शासन ने मंजूर किया है, उसके अलावा यदि पैसा कहीं और खर्च होता है तो संबंधित मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और वित्त नियंत्रक की जिम्मेदारी होगी। इस राशि से हुए खर्च का मासिक विवरण चिकित्सा शिक्षा निदेशक के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा, जहां इसकी बारीक निगरानी की जाएगी। गौरतलब है कि पूर्व में भी कुछ ऐसी ही व्यवस्था मेडिकल कॉलेजों के लिए हुआ करती थी, मगर 11 मार्च 2016 को मेडिकल कॉलेजों के स्तर पर राशि का दुरुपयोग होने के चलते इसे समाप्त कर दिया गया था।
स्वास्थ्य सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति के लिए यह इंतजाम किया गया है। इस बात की निगरानी भी की जाएगी कि कहीं मेडिकल कॉलेजों के स्तर से पैसा का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है।
- नीतेश झा, सचिव (स्वास्थ्य)