आपदा में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए पर्यटक आवास गृहों (टीआरएच) को बनाने के लिए जमीन नहीं मिल रही है। पैसा तो है, लेकिन जमीन न मिलने से इन टीआरएच का निर्माण अधर में लटका हुआ है।
वहीं करीब 25 पर्यटक आवास गृहों के जीर्णोद्धार भी अभी पूरा नहीं हुआ है। पर्यटन सीजन सामने है और अब तक काम अधूरा है, ऐसे में एक बार फिर पर्यटकों को मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है।
जून 2013 में आई आपदा में गढ़वाल मंडल विकास निगम लिमिटेड (जीएमवीएन) के केदारनाथ, रामबाड़ा, चंद्रापुरी और स्यालसौड़ पर्यटक आवास गृह पूरी तरह से बह गए थे। ये सभी पर्यटक आवास गृह रुद्रप्रयाग और केदारनाथ धाम के बीच के मार्ग पर स्थित है।
पिछले दो-तीन साल से इससे जीएमवीएन को नुकसान भी हो रहा था। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के सहयोग से इनके पुनर्निर्माण के लिए बजट भी आया। अब स्थिति यह है कि पैसा तो है, लेकिन टीआरएच के निर्माण के लिए वहां पर जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
चंद्रापुरी में तो जहां जीएमवीएन का पर्यटक आवास गृह था, वहां पूरी जमीन खिसक चुकी है। वहां पर टीआरएच बनाने की स्थिति नहीं है। न ही आसपास कहीं कोई जमीन टीआरएच के निर्माण के लिए उपलब्ध हो पा रही है। स्यालसौड़ में भी जो जगह बची है वह खतरे की जद में है। इसी तरह, रामबाड़ा पर्यटक आवास गृह की स्थिति भी है।
जीएमवीएन के उपमहाप्रबंधक (परियोजना) गंभीर सिंह ने बताया कि आपदा से क्षतिग्रस्त हुए टीआरएच के पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए 64.03 करोड़ रुपये का बजट मिला है। श्यालसौड़ और चंद्रापुरी में जगह नहीं मिल पा रही है। श्यालसौड़ की जगह तिलबाड़ा में 52 कक्ष के हट का टीआरएच बनाया जा रहा है। 32 हट बन भी चुके हैं।
रामबाड़ा की जगह त्रिजुगीनारायण में टीआरएच विकसित करने के प्रयास हो रहे हैं। इसके अलावा 25 पर्यटक आवास गृहों के जीर्णोद्धार पर भी तेजी से काम चल रहा है। आगामी यात्रा सीजन शुरू होने से पहले ये सभी काम पूरे कर लिए जाएंगे।