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न रोजगार ही मिला और न ही भत्ता

Mon, 01 May 2017 02:09 PM IST
भूपेंद्र मोहन रौतेला / अमर उजाला, नैनीताल
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पैसा - फोटो : Today City
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उत्तराखंड गठन के 16 सालों के बाद भी बेरोजगारों को रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। हालत यह है कि विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पद होने के बाद भी उन्हें भरा नहीं जा रहा है, जबकि राज्य में प्रशिक्षित बेरोजगारों की फौज खड़ी है।
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ऐसे में परेशान बेरोजगारों को रोजगार के लिए अन्य राज्यों में पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। अकेले नैनीताल जिले के सेवायोजन दफ्तरों में 7489 बेरोजगार ऐसे हैं, जिन्हें बेरोजगारी भत्ता नहीं मिल पाया है। बेरोजगारी भत्ते को बांटने के लिए 13 करोड़ रुपये की जरूरत है। 

क्या है स्थिति 
नैनीताल 
जिला सेवायोजन दफ्तर नैनीताल की बात करें तो यहां पर 4049 बेरोजगार ऐसे हैं, जो बेरोजगारी भत्ते के पात्र हैं। इन बेरोजगारों को सितंबर 2014 तक ही बेरोजगारी भत्ता मिल पाया है। अब इन बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ते के लिए 8 करोड़ रुपये और चाहिए। 
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हल्द्वानी 
हल्द्वानी सेवायोजन दफ्तर में 1983 बेरोजगार बेरोजगारी भत्ते की श्रेणी में पंजीकृत हैं, जिन्हें मार्च 2015 तक ही बेरोजगारी भत्ता मिल पाया है। इनको भत्ता देने के लिए 3 करोड़ रुपये की जरूरत है। 

रामनगर 
रामनगर सेवायोजन दफ्तर में पंजीकृत 1459 बेरोजगारों को दिसंबर 2014 तक ही बेरोजगारी भत्ता मिल पाया है। इन बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने के लिए करीब दो करोड़ रुपये की और जरूरत है। 

अब तक कितने बेरोजगार हुए पंजीकृत 
जिले में कुल पंजीकृत बेरोजगारों की बात करें तो जिले में राज्य गठन के बाद से लेकर मार्च 2017 तक 2 लाख 50 हजार 542 बेरोजगार पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें से केवल 1615 बेरोजगारों को ही रोजगार मिल सका है। ऐसी हालत में बेरोजगार भी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। 

मामले को लेकर काफी गंभीर हूं। बेरोजगारी भत्ते के लिए शासन से धनराशि की मांग की गई है। धनराशि मिलते ही बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ते का वितरण कर दिया जाएगा। 
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- प्रियंका गडिया, जिला सेवायोजन अधिकारी
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