उत्तराखंड में सरकारी विभागों की मनमानी के आगे मुख्यमंत्री हरीश रावत के आदेश भी बेबस हैं। मुख्यमंत्री की घोषणाओं के क्रियान्वयन से लेकर आदेशों के पालन तक में हो रही लापरवाही से इस दावे की तस्दीक होती है। ताजा मामला स्वास्थ्य महकमे से जुड़ा है। मुख्यमंत्री के बाद दो बार स्वास्थ्य मंत्री भी आदेश का पालन करने को कह चुके हैं लेकिन विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई असर नहीं पड़ा।
मामला प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सभी तरह की जांचों को मुफ्त करने से जुड़ा है। पिछले करीब दो वर्षों से स्वास्थ्य मंत्री लगातार जांच मुफ्त करने का दावा करते रहे। हालांकि, कई बार तिथि बदलने के बाद भी मुफ्त जांच का आदेश नहीं हो सका।
किसी तरह पिछले माह स्वास्थ्य मंत्री ने योजना लागू करने की घोषणा की लेकिन आज तक इसका क्रियान्वयन शुरू नहीं हो सका है। केंद्र सरकार के 500 और 1000 के नोटबंदी के आदेश के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकारी अस्पतालों में सभी तरह की जांचें मुफ्त करने का ऐलान किया था। हालांकि, इसका विधिवत आदेश जारी नहीं हुआ।
स्वास्थ्य मंत्री ने विभागीय समीक्षा बैठक ली तो आदेश जारी न होने की जानकारी मिली। इस पर उन्होंने अधिकारियों को तत्काल आदेश जारी कर उसका क्रियान्वयन कराने के निर्देश दिए। करीब एक पखवाड़े बाद दोबारा हुई समीक्षा में भी नतीजा नहीं निकला। इस पर उन्होंने मुख्यमंत्री के आदेश को शीघ्र क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। उसके बावजूद अभी तक अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त जांच का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
टीचिंग अस्पतालों पर संशय
सरकार का यह आदेश राजकीय मेडिकल कॉलेजों के टीचिंग अस्पतालों पर लागू होगा या नहीं, इसको लेकर संशय बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में जांच मुफ्त करने का दावा किया था। टीचिंग अस्पताल भी सरकार के अधीन हैं। टीचिंग अस्पतालों में जांच मुफ्त होगी या नहीं, इसका पता आदेश लागू होने के बाद ही चल पाएगा।
हमने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को आदेश भेजकर उसका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कह दिया है। व्यक्तिगत रूप से फोन भी किया है। उसके बावजूद आदेश का क्रियान्वयन न होना गंभीर चिंता का विषय है। सभी को तत्काल जांच मुफ्त करने को कहा जाएगा।
-डॉ. कुसुम नरियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक