इसके बाद संस्थान शासन से लगातार पत्राचार कर उक्त जमीन को देने की मांग करता रहा। संस्थान की योजना थी कि आईटीआई के सुरक्षित भवनों से मलबा हटाने के साथ ही प्री फेब्रिकेटेड भवन खड़े किए जाएं, ताकि यहां कक्षाएं और लैब संचालित हों। प्रदेश शासन ने आईटीआई के आवासीय भवन पुलिस को हस्तांतरित कर दिए, जबकि अनावासीय भवन तब से वीरान पड़े हैं। यदि समय पर प्रदेश सरकार इस भूमि को एनआईटी को दे देती, तो शायद यह स्थिति नहीं आती।
एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी कैंपस के निर्माण और अन्य सुविधाओं की मांग के लिए पिछले साल 20 अगस्त से भी छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ था, जो 27 अगस्त को खत्म हो गया था। तब छात्रों से यह कहा गया था कि तीन माह के अंदर स्थायी कैंपस के लिए जमीन देख ली जाएगी, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी जमीन चयनित नहीं की गई है। हालांकि आंदोलन के बाद छात्रों के लिए निजी होटल किराये पर लेकर छात्रावास बनाए गए। छात्रों का ज्यादा गुस्सा इसी बात पर है कि किसी ने भी अपना वादा नहीं निभाया।
एनआईटी को आईटीआई की जमीन दी जा रही है। साथ ही रेशम फार्म से कक्षाओं से हॉस्टल जाने के लिए कोरिडोर के लिए भूमि दी जाएगी।
-सुशील कुमार, डीएम पौड़ी