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एनआईटी उत्तराखंड स्थायी कैंपस प्रकरण: अब दे रहे जमीन, जब चले गए छात्र 

Mon, 10 Dec 2018 10:09 AM IST
संदीप थपलियाल, अमर उजाला, श्रीनगर
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Trivendra Singh Rawat
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एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड के स्थायी कैंपस निर्माण और अस्थायी कैंपस के स्थानांतरण के मामले में चल रही उठापटक के लिए सत्तारूढ़ दल ही जिम्मेदार नजर आते हैं।

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प्रदेश में अभी तक जिस भी पार्टी की सरकार बनी, एनआईटी के संबंध में ठोस निर्णय नहीं ले पाई। आईटीआई की जिस भूमि को अब अस्थायी कैंपस के लिए देने की बात प्रदेश सरकार कर रही है, उस जमीन को एनआईटी प्रशासन पिछले चार साल से मांग रहा था। संस्थान को उक्त भूमि तब दी जा रही है, जब संस्थान के अधिकतर बच्चे एनआईटी जयपुर शिफ्ट कर दिए गए हैं।  

वर्ष 2009 में स्वीकृत एनआईटी उत्तराखंड वर्ष 2010 से श्रीनगर स्थित पॉलीटेक्निक और आईटीआई की परिसंपत्तियों में संचालित हो रहा है। संस्थान में छात्रों की संख्या और नए कोर्स शुरू होने की वजह से यहां भवनों की कमी हो गई। वर्ष 2013 में आई बाढ़ में आईटीआई के दबने के बाद एनआईटी ने सरकार से इस भूमि और भवन की मांग की। आठ अक्तूबर 2013 को एनआईटी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित किया गया।

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पिछले साल के आंदोलन के बाद भी नहीं चेती सरकार 

इसके बाद संस्थान शासन से लगातार पत्राचार कर उक्त जमीन को देने की मांग करता रहा। संस्थान की योजना थी कि आईटीआई के सुरक्षित भवनों से मलबा हटाने के साथ ही प्री फेब्रिकेटेड भवन खड़े किए जाएं, ताकि यहां कक्षाएं और लैब संचालित हों। प्रदेश शासन ने आईटीआई के आवासीय भवन पुलिस को हस्तांतरित कर दिए, जबकि अनावासीय भवन तब से वीरान पड़े हैं। यदि समय पर प्रदेश सरकार इस भूमि को एनआईटी को दे देती, तो शायद यह स्थिति नहीं आती।  

एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी कैंपस के निर्माण और अन्य सुविधाओं की मांग के लिए पिछले साल 20 अगस्त से भी छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ था, जो 27 अगस्त को खत्म हो गया था। तब छात्रों से यह कहा गया था कि तीन माह के अंदर स्थायी कैंपस के लिए जमीन देख ली जाएगी, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी जमीन चयनित नहीं की गई है। हालांकि आंदोलन के बाद छात्रों के लिए निजी होटल किराये पर लेकर छात्रावास बनाए गए। छात्रों का ज्यादा गुस्सा इसी बात पर है कि किसी ने भी अपना वादा नहीं निभाया।  

एनआईटी को आईटीआई की जमीन दी जा रही है। साथ ही रेशम फार्म से कक्षाओं से हॉस्टल जाने के लिए कोरिडोर के लिए भूमि दी जाएगी।
-सुशील कुमार, डीएम पौड़ी 
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