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उत्तराखंड: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के 900 छात्रों ने एक साथ छोड़ा कॉलेज, ये है वजह

Wed, 24 Oct 2018 08:34 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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सामान के साथ प्रदर्शन करते छात्र - फोटो : अमर उजाला
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श्रीनगर। पखवाड़े भर के आंदोलन के बाद भी मांग पर सुनवाई नहीं होने से मंगलवार को एनआईटी उत्तराखंड के करीब 900 छात्र-छात्राओं ने कैंपस छोड़ दिया। छात्र हॉस्टल के कमरों में ताले डालकर चले गए।

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सभी छात्र एनआईटी स्थायी कैंपस के निर्माण और नया कैंपस बनने तक सुविधाजनक स्थान पर शिफ्ट किए जाने की मांग के लिए बीते कई दिनों से कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे थे। दूसरी ओर संस्थान में संपन्न कैंपस इंटरव्यू में केवल 35 छात्रों ने ही हिस्सा लिया।

विगत तीन अक्तूबर को एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) हॉस्टल से लैब की ओर जाते हुए दो छात्राओं को बदरीनाथ हाईवे पर एक बेकाबू कार ने टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में एक छात्रा गंभीर घायल हो गई थी, जिसका अस्पताल में उपचार चल रहा है।

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कैंपस हॉस्टलों में ताले लगा दिए

घटना से आक्रोशित संस्थान के लगभग 980 छात्र-छात्राएं (बीटेक, एमटेक व पीएचडी) चार अक्तूबर से कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे थे।

इस बीच नवरात्र की छुट्टियों के चलते कई छात्र अवकाश पर चले गए थे, लेकिन मंगलवार सुबह अचानक छात्र-छात्राएं अपना सामान लेकर हॉस्टल से बाहर निकल आए और वहां से चले गए।

कुछ ही छात्रों ने बाहर जाने की सूचना रजिस्टर में दर्ज कराई। छात्रों ने कहा कि वह तभी लौटेेंगे, जब उन्हें सुविधाजनक स्थान आवंटित किया जाएगा। इधर, संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि छात्रों ने उनको हॉस्टल छोड़ने की कोई सूचना नहीं दी है। अलबत्ता बीटेक चतुर्थ वर्ष के छात्रों को भविष्य देखते हुए कक्षाओं में लौटने का अनुरोध किया गया है। 
 

छात्रों को मोहरा बनाया जा रहा है

परिसर छोड़ने से पूर्व छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, उत्तराखंड के राज्यपाल व मुख्यमंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री उत्तराखंड, एमएचआरडी सचिव और एनआईटी के निदेशक को पत्र भेजे हैं, जिसमें उन्होंने तत्काल दूसरे अस्थायी कैंपस में शिफ्ट किए जाने की बात लिखी है।

कहा कि कैंपस सुविधाजनक, चिकित्सीय सुविधा, कॉरपोरेट एक्सपोजर और मानकों को पूरा करता हो। उनका कहना है कि आंदोलन के 20 दिन होने के बाद भी राज्य व केंद्र सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा छात्रों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में भी पत्र वायरल किया है। 

हमारे पास यही सूचना है कि कुछ छात्रों ने रजिस्टर में बाहर जाने की बात लिखी है। वह कहां गए हैं, हमें नहीं मालूम। उन्होंने नियमानुसार अपने बाहर जाने की सूचना हमें नहीं दी है। हमने चतुर्थ वर्ष के बच्चों से सेमेस्टर पूरा करने का अनुरोध किया है, ताकि उनका प्लेसमेंट हो सके।
-प्रो. आरबी पटेल, कार्यवाहक निदेशक एनआईटी उत्तराखंड
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प्रजम 10 से शुरू करेगा आंदोलन

प्रगतिशील जन मंच ने नगर में पेयजल, स्वास्थ्य व एनआईटी के स्थाई परिसर निर्माण के मुद्दों को लेकर फिर से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। कहा कि मांगों के लिए कई बार शासन प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।   

सोमवार को प्रजम के अध्यक्ष अनिल स्वामी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि श्रीनगर व पौड़ी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने वाली योजना का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। जबकि निर्माण कार्य के लिए पेयजल निगम देवप्रयाग को 10 करोड़ पांच लाख की धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है।

साथ ही एनआईटी के स्थाई परिसर निर्माण, मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं में सुधार व पानी के बिलों से संबंधित समस्याओं का हल नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि मांगों को पूरा करने के लिए शासन प्रशासन की तरफ से मिले आश्वासन के बाद प्रजम ने अपना आंदोलन 31 मई को स्थगित कर दिया था। तब से कई बार मांगों के ज्ञापन भेजे व सौंपे भी गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। अब प्रजम मांगों के लिए 10 नवंबर से आंदोलन शुरू करेगा।  
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