नगर निकायों के आरक्षण के खिलाफ एक और याचिका हाईकोर्ट में दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। आरक्षण से असंतुष्ट कांग्रेस के साथ ही अंदरखाने भाजपा के नेता भी गोलबंद हो रहे हैं। याचिका दाखिल करने को लेकर राय मशविरा करने के साथ ही इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े अधिवक्ता से भी संपर्क साधा है, ताकि हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में जाया जा सके।
दरअसल, नगर निकायों के तय किए गए आरक्षण से कई पालिकाएं, पंचायतों और निगमों में चुनाव लड़ने की नेताओं की मंशा पर पानी फिर गया है। इनमें कांग्रेस और सत्तारूढ़ भाजपा के नेता भी शामिल हैं। एक निकाय से अध्यक्ष की तैयारी में जुटे कांग्रेस के नेता ने बताया कि निकायों में मनमाने ढंग से किए गए आरक्षण से कई नेता खफा हैं।
निकाय चुनाव में बाजपुर और श्रीनगर को शामिल करने के हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे, लेकिन सरकार ने उनको शामिल किए बिना निकायों का आरक्षण तय करने के साथ ही चुनाव प्रक्रिया भी शुरू कर दी। बताया कि बाजपुर और श्रीनगर को चुनाव की प्रक्रिया में शामिल करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की पूरी तैयारी है।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के एक अधिवक्ता से भी बातचीत हो चुकी है। कहा कि आरक्षण से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कांग्रेस के अलावा कई भाजपा नेता भी परेशान हैं। ये सारे लोग आपस में संपर्क में हैं। कहा कि केलाखेड़ा में नगर पंचायत के गठन से अब तक सामान्य सीट ही होती आई है, जबकि वहां ओबीसी की जनसंख्या बहुत है। कहा कि उम्मीद है कि कोर्ट से जरूर उनको राहत मिलेगी।