मेयर पद के लिए हुए आरक्षण को हाईकोर्ट में चुनौती देने वाली याचिका शुक्रवार को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अधिवक्ता डीके त्यागी ने सात में से पांच निगमों में मेयर पदों को आरक्षण में लाए जाने को आधार बनाते हुए यह याचिका दाखिल की थी।
शुक्रवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंडपीठ ने अधिवक्ता डीके त्यागी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इस प्रकरण पर चुनौती दी जानी चाहिए थी। अभी चुनाव प्रक्रिया चल रही है।
याची का कहना था कि सरकार ने प्रदेश के सात नगर निगमों में मेयर पद के लिए गलत तरीके से आरक्षण तय किया है। अभी सरकार सात नगर निगमों में चुनाव करा रही है। मेयर के सात में से पांच पद आरक्षित कर दिए गए हैं और दो पद अनारक्षित हैं जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आरक्षण पचास प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। सरकार ने यह आरक्षण 70 प्रतिशत कर दिया है। याचिका में आरक्षण की प्रक्रिया को दोबारा तय करने की मांग की गई है।