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निकाय चुनाव 2018 : इस बार मत्रियों की भी परीक्षा, भगवा बुलंद करने का सबसे ज्यादा दबाव

Thu, 01 Nov 2018 11:37 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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हल्द्वानी जिला उपकारागार से बहार आते उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत।हल्द्वानी जिला उपकारागार से बहार आते उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत। - फोटो : amar ujala file photo
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विधानसभा में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद भाजपा नगर निकाय चुनाव की परीक्षा का सामना कर रही है। सभी नगर निगमों में भगवा बुलंद करने का उस पर सबसे ज्यादा दबाव है। कोटद्वार और ऋषिकेश नगर निगम में वह बगावत से सहमी है तो बाकी निगमों में उसे पार्टी प्रत्याशियों को जिताने के लिए अपने सारे मंत्रियों को झोंकना पड़ गया है।

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इस तरह ये चुनाव मुख्यमंत्री की ही नहीं मंत्रियों की प्रतिष्ठा का सवाल बन गए हैं। सियासी जानकार इसे मंत्रियों के इम्तहान के तौर पर भी देख रहे हैं। उनका कहना है कि 70 में से 57 विधानसभा जीतने वाली भाजपा के सामने प्रदेश के शहरी वोटरों पर अपना दबदबा बनाए रखने की चुनौती भी है। उनके हिसाब चुनावी नतीजे सरकार और उसके मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड भी लिखेंगे। यही वजह है कि सरकार और संगठन ने रणनीतिक तौर पर वरिष्ठ नेताओं के साथ मंत्रियों को खासतौर पर नगर निगमों में भाजपा प्रत्याशी को जिताने की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें वहां कैंप करके पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने को कहा गया है।

नगर निगमों कहां क्या समीकरण
देहरादून नगर निगम : देहरादून नगर निगम का जिम्मा उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ.धनसिंह रावत के पास है। करीबी होने की वजह से पार्टी प्रत्याशी सुनील उनियाल गामा को जिताने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की भी मानी जा रही है। यहां सीएम और मंत्री दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर है। इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार दिनेश अग्रवाल हैं, जिनका कद और अनुभव भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
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ऋषिकेश नगर निगम : इस सीट पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को पार्टी ने जिम्मा सौंपा है। भाजपा इस सीट पर बड़ी मुश्किल से बगावत के झटके से उबरी है। इस सीट पर क्षेत्रीय विधायक होने के नाते विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। यहां भाजपा ने अनीता ममगाईं को प्रत्याशी बनाया गया है। यहां भाजपा त्रिकोण मुकाबले में फंसी है।
हरिद्वार नगर निगम : यहां मेयर पद पर भाजपा को जिताने का दारोमदार स्थानीय विधायक और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक का है। सूत्रों की मानें तो पार्टी ने टिकट बांटने के समय कौशिक की पसंद और नापसंद का खास ध्यान रखा है, इसलिए यहां भाजपा को विजयी बनाने की भी जिम्मेदारी उन्हीं की मानी जा रही है।
हल्द्वानी नगर निगम: हल्द्वानी नगर निगम में कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य की प्रतिष्ठा दांव मानी जा रही है। यहां पार्टी के  पक्ष में हवा बनाने की जिम्मेदारी आर्य को सौंपी गई है। सियासी कौशल के तौर पर आर्य का मुकाबला कांग्रेस की कद्दावर नेत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश से है, जो अपने बेटे सुमित हृदयेश को विजयी बनाने के लिए सारी ताकत झोंक रही हैं। हल्द्वानी इंदिरा का गढ़ माना जाता है, जबकि आर्य की मजबूत पकड़ बेतालघाट और बाजपुर में मानी जाती है। इस लिहाज से भाजपा प्रत्याशी जोगेंद्र रौतेला को जिताने के लिए उन्हें ज्यादा समय और ताकत लगानी पड़ सकती है।
रुद्रपुर नगर निगम : रुद्रपुर नगर निगम में भाजपा ने कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत को जिम्मेदारी दी है। सियासी जानकारों की मानें तो रुद्रपुर की तुलना में पंत नैनीताल जनपद में ज्यादा प्रभावी होते। बहरहाल, उन पर पार्टी प्रत्याशी रामपाल सिंह को जिताने की जिम्मेदारी है। उनके साथ कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय के दमखम की भी परीक्षा है।
काशीपुर नगर निगम : काशीपुर नगर निगम में भाजपा ने राज्यमंत्री रेखा आर्या को जिम्मा सौंपा है। लेकिन इस चुनावी क्षेत्र में बड़ा प्रभाव पार्टी विधायक हरभजन सिंह चीमा का है। अस्वस्थ होने के कारण चीमा का निगम चुनाव में बहुत ज्यादा सक्रियता से काम करना संभव नहीं माना जा रहा है। इस लिहाज से दबाव आर्या पर आ गया है। काशीपुर में भाजपा ने ऊषा चौधरी को मैदान में उतारा है।
कोटद्वार नगर निगम: कोटद्वार नगर निगम में भाजपा दो-दो बागी उम्मीदवारों के बीच फंसी है। इस सीट पर पार्टी ने लैंसडौन के विधायक दिलीप रावत की पत्नी नीतू रावत को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद पार्टी शशि नैनवाल व विभा चौहान से पर्चा वापस नहीं करा सकी। स्थानीय विधायक होने के नाते कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की यहां प्रतिष्ठा दांव पर मानी जा रही है।

नगर निकाय चुनाव में भाजपा काफी मजबूत स्थिति में हैं। कार्यकर्ता से लेकर पदाधिकारी और मंत्री तक सब पार्टी के पक्ष में काम कर रहे हैं। चुनाव में भाजपा को जबर्दस्त कामयाबी मिलेगी और सभी नगर निगमों में भगवा फहराएगा।
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- अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

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