फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एनएच-74 घोटाला: ऑर्बिट्रेटरों ने ‘बैकडेट’ में दे दिए फैसले, स्कूल और पंचायत घरों का भी दिया मुआवजा 

Tue, 07 Aug 2018 11:07 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
Tilak Raj Behar
विज्ञापन

एनएच घोटाले में ऑर्बिट्रेटरों की भूमिका पर उठ रहे सवालों के बीच एसआईटी जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि मुआवजा देने के मामलों में न केवल फैसले बैकडेट में दिए गए, बल्कि पक्षकार को सुने बिना भी फैसला दे दिया गया। भ्रष्टाचार की इतंहा तो यहां तक हो गई है कि सरकारी स्कूल, पंचायत घर के कब्जेदारों तक को मुआवजा बांट दिया गया। 

विज्ञापन


मिली जानकारी के मुताबिक ऊधमसिंह नगर में बतौर डीएम तैनात रहे डॉ. पंकज पांडेय और चंद्रेश यादव की ओर से की गई ऑर्बिट्रेशन की प्रक्रिया में अनियमितताओं की बात एसआईटी रिपोर्ट में सामने आई है। शासन के सूत्रों की मानें तो इन्हीं के कार्यकाल में ऑर्बिट्रेशन के लिए आए वाद संख्या 51/42 में सुनवाई के लिए छह नवंबर 2015 की तिथि निश्चित हुई। इसके लिए बाकायदा समन भी भेजा गया। नियमानुसार निर्धारित तिथि पर सुनवाई के बाद ही ऑर्बिट्रेटर को अपना फैसला देना चाहिए, परंतु इस मामले में पांच नवंबर को ही आदेश पारित कर दिया गया। इसी तरह वर्ष 2015-16 में वाद संख्या 51/41 और 51/38 में भी बिना पक्षकार को सुने आदेश जारी किए गए। बैकडेट में फैसले देने के मामले में एक न्यायिक अधिकारी ने टिप्पणी की है कि यह आदेश तो स्वत: अवैध है। 
 
सरकारी स्कूल, पंचायत घर के कब्जेदारों को भी दे दिया मुआवजा
एनएच-74 घोटालों से जु़ड़े अफसरों ने सरकारी पंचायत घर, सरकारी सीलिंग और राजकीय प्राथमिक पाठशाला की जमीनों के कब्जेदारों तक को दोनों हाथों से मुआवजा बांटा। एसआईटी की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि जमीन के सरकारी होने की बात पता होते हुए भी धड़ल्ले से मुआवजा जारी किया गया।
विज्ञापन


एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि सरकारी जमीन पर किसी व्यक्ति के कब्जे पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है, मगर इस घोटाले में इन स्थानों पर काबिज लोगों को भी मुआवजा बांटा गया। उदाहरण के तौर पर, राजकीय प्राथमिक पाठशाला पर सुरेश गंगवार पुत्र ईश्वरी प्रसाद गंगवार, सरकारी पंचायत घर और सरकारी गैर कृषि भूमि पर ईश्वरी प्रसाद गंगवार पुत्र कुंदन लाल को सरकारी खन्ती पर वीरपाल पुत्र इंद्रपाल, सरकारी सीलिंग की जमीन पर दलीप कुमार की पत्नी परणिता और बेटे उदित को मुआवजा दे दिया गया। ऐसे कई मामले जांच में समाने आए हैं। 

सफेदपोश नेताओं के खिलाफ भी व्यापक प्रमाण
एनएच-74 घोटालों में अफसर, काश्तकारों और दलालों ने ही वारे-न्यारे नहीं किए, बल्कि तमाम सफेदपोश नेता भी इसमें बराबर शरीक हैं। सूत्रों की मानें तो इनके खातों में रुपए का लेनदेन हुआ है। यही नहीं अधिकारियों और उनकी बातचीत की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। खबर तो यह भी है कि एसआईटी के पास इनके खिलाफ पर्याप्त सुबूत हैं। सूत्रों का दावा है कि यह सुबूत सामने आ जाएं, तो प्रदेश की राजनीति में खलबली मच सकती है।

एनएच वालों ने नहीं की अपील
वैसे तो ऑर्बिट्रेशन में यदि किसी काश्तकार का मुआवजा बढ़ा दिया जाता है तो दूसरे पक्ष यानी नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को जनपद न्यायालय में इसके खिलाफ अपील करने का अधिकार है। मगर अरबों के इस घोटाले में इक्का-दुक्का मामलों को छोड़कर  न्यायालय में अपील नहीं की गई। ऐसे में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर एनएच अफसरों पर भी घपले में शामिल होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।

ऑर्बिट्रेशन में लगभग तीन दर्जन से ज्यादा मामलों में गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं। इसमें न केवल अधिकारी शामिल हैं, बल्कि तमाम सफेदपोश नेताओं ने भी करोड़ों के वारे-न्यारे किए हैं। निजी भूमि ही नहीं सरकारी जमीनों का मुआवजा बेधड़क बांटा गया। छोटे ही नहीं ऊपर के अफसरों को भी सारी खबर थी। सरकार को मामले में सीबीआई जांच करानी चाहिए।
विज्ञापन

- तिलक राज बेहड़, पूर्व मंत्री 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें