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एनएच 74 घोटाला: नेताओं और दो आईएएस अफसरों तक पहुंची जांच की आंच, बैकडोर से पहुंचाया लाभ

Wed, 08 Aug 2018 10:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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घोटाला - फोटो : amar ujala
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नेशनल हाइवे 74 भूमि मुआवजा घोटाले में चल रही जांच की आंच अब कुछ नेताओं तक पहुंच गई है। इन नेताओं को घोटाले के दौरान पर्दे के पीछे से भरपूर लाभ पहुंचाया गया है। जांच पूरी होने से पहले ही कुछ नेताओं से इस संबंध में पूछताछ की जाएगी। इस मामले में दो आईएएस अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी।

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एनएच घोटाले में कुछ नेताओं का कच्चा चिट्ठा भी खुल सकता है। एसआईटी सूत्रों के मुताबिक अब तक फंसे अधिकारी दबी जुबान में कुछ नेताओं के नाम ले रहे हैं। हालांकि, न तो कोई खुलकर सामने आया और न ही उनके खिलाफ कोई लिखित साक्ष्य मिले हैं। बावजूद इसके स्थानीय से लेकर बड़े राजनेता एसआईटी के रडार पर हैं। बता दें कि इस घोटाले में अब तक किसानों और छोटे अधिकारियों से लेकर आईएएस अधिकारियों के नाम तक सामने आ चुके हैं। ऑर्बिट्रेटरों की भूमिका में रहे अधिकारियों की नियत पर भी एसआईटी ने सवाल उठाए थे। इसी को लेकर शासन स्तर तक अब बहस छिड़ चुकी है।

इस पूरे घटनाक्रम में राजनीतिकव्यक्ति का अब तक नाम सामने नहीं आया है। जबकि, यह बड़ा प्रश्न बना हुआ है कि क्या बिना राजनीतिक दखल के सिर्फ अधिकारियों और चंद लोगों की सांठगांठ से इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया? तो इसका उत्तर जल्द ही सबके सामने आ सकता है। एसआईटी सूत्रों की माने तो अब तक जो लोग पकड़ में आए हैं उनके नेताओं के करीबी संबंध हैं। जो सीधे तौर पर तो कहीं सामने नहीं आए हैं, मगर उन्हें भरपूर लाभ पहुंचाया गया है। सूत्रों के मुताबिक पैसों के लेनदेन में कुछ नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, मगर इसके अभी लिखित प्रमाण नहीं मिले हैं। चूंकि जांच अब अंतिम दौर में है तो माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ नेताओं के नाम का खुलासा भी किया जा सकता है। 
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जमा किया गया मुआवजा वापस लेने के लिए करेंगे क्लेम : गंगवार 
किच्छा तहसील के बरा गांव में सरकारी भूमि पर बांटे गए मुआवजे को लेकर घिरे जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद गंगवार के पुत्र सुरेश गंगवार का कहना है कि उन्हें एनएचएआई की ओर से भवनों के स्ट्रक्चर पर मुआवजा दिया गया था। एसआईटी उन पर सरकारी भूमि पर कब्जे का आरोप लगाकर मुआवजा लेने की बात कहकर उन्हें दोषी करार दे रही है। कहा कि वे जमा कराए गए मुआवजे को वापस लेने के लिए क्लेम करेंगे। मंगलवार को जिला पंचायत भवन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए सुरेश गंगवार का कहना था कि एनएच-74 पर बसी ग्राम सभा बरा में लोगों को स्ट्रक्चर पर मुआवजा दिया गया था। गांव में 1883 से उनके पूर्वजों के नाम से जमीनें हैं। इन पर स्कूल, नहर, पंचायत घर और अस्पताल आदि बनाए गए। उस पर उनके पूर्वजों को भी मुआवजा नहीं दिया गया, जिसकी लोनिवि की ओर से रिपोर्ट भी दी गई है।

एनएच-74 निर्माण के दौरान जो मुआवजा उन्हें दिया गया, वह स्कूल और पंचायतघर के बाहर बनी दुकानों का दिया गया। इस तरह का मुआवजा लेने वाले करीब ढाई सौ किसान गांव में हैं। बताया कि वर्ष 2007 में भी कुछ लोगों की शिकायत पर मामले की जांच कर लोकायुक्त ने उन्हें क्लीन चिट दी थी। उन्हें चार दुकानों पर मुआवजा दिया गया था। इसमें से वह 83,817 रुपये अपने नाम से और 1,45,623 रुपये अपने पिता ईश्वरी प्रसाद गंगवार के नाम से सरकार को लौटा चुके हैं। बचे हुए मुआवजे को लेकर तीन मामले जिला कोर्ट में और अन्य हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं। कहा कि क्षेत्र में निर्माण पर मुआवजा लेने वाले सैकड़ों लोग हैं, लेकिन सिर्फ उन्हें दोषी बनाया जा रहा है। जनप्रतिनिधि होने के नाते कुल 2,29,440 रुपये का मुआवजा सरकार को लौटाया गया है, जिसे वह वापस मांगेंगे। एसआईटी के आरोपों को देखते हुए उन्हें लगता है कि उन्हें मुआवजा वापस नहीं करना चाहिये था।

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आईएएस पंकज पांडे और चंद्रेश यादव से होगी पूछताछ

investigation
एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में एसआईटी दो-तीन दिन के भीतर आईएएस पंकज पांडे और चंद्रेश यादव से देहरादून जाकर पूछताछ करेगी। कुछ दिन पूर्व एसआईटी ने दोनों अफसरों की ओर से आर्बिट्रेशन के मामलों में अनियमितता बरतने की रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इसके आधार पर शासन ने एसआईटी को मामले की विवेचना जारी रखते हुए दोनों अफसरों से पूछताछ करने की मंजूरी दे दी है। भूमि मुआवजा घोटाले में तत्कालीन अफसरों और काश्तकारों की जांच के बाद एसआईटी के सामने इस बात का खुलासा हुआ था कि तत्कालीन एसएलओ डीपी सिंह और अनिल शुक्ला की ओर से भू-अधिग्रहण के 16 मामलों में अभिनिर्णय आदेश पारित किए गए थे। इसमें कुछ मामलों में कृषि भूमि को अकृषि और कुछ मामलों में सरकारी भूमि को निजी दर्शाकर करोड़ों का मुआवजा निर्धारण किया गया था। इन सभी मामलों के वाद तत्कालीन डीएम पंकज पांडे और चंद्रेश यादव के आर्बिट्रेशन न्यायालय में दायर हुए थे। आर्बिट्रेटरों की ओर से पारित किए गए संशोधित निर्णय के आधार पर एनएचएआई ने काश्तकारों को चार गुना मुआवजा बांट दिया।

अनियमितता के साक्ष्य मिलने पर कुछ दिन पूर्व एसआईटी ने करीब सवा चार सौ पन्नों की जांच रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी। इसके आधार पर अब शासन ने एसआईटी को मामले की विवेचना जारी रखते हुए आईएएस पंकज पांडे और चंद्रेश यादव से पूछताछ करने की अनुमति दे दी है। बताया जा रहा है कि दोनों अफसरों से पूछताछ के लिए दो-तीन दिन के भीतर एसआईटी देहरादून रवाना हो सकती है। पूछताछ के बाद एसआईटी दोनों अफसरों के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति भी मांग सकती है। 

तबादले के बाद सुनाया था फैसला 
भूमि मुआवजा घोटाले में आर्बिट्रेटरों ने किस कदर लापरवाही बरती, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक आईएएस अफसर ने आर्बिट्रेशन के मामले में फैसला सुनाने के लिए तारीख तय की, लेकिन इस तारीख से पहले अफसर का तबादला हो गया। इसके बाद अफसर ने तय तारीख से पहले ही मामले में फैसला सुना दिया। भूमि मुआवजा घोटाले में अब तक 17 किसान सरकार को मुआवजे की रकम का कुछ हिस्सा वापस कर चुके हैं। मुआवजा लौटाने वाले किसानों ने एसआईटी को लिखित में दिया है कि उन्होंने गलत तरीके से मुआवजा लिया। चूंकि एसआईटी की मंशा मुआवजे की पूरी रकम वसूल करने की थी, लेकिन किसानों की ओर से पूरा मुआवजा नहीं लौटाया गया है। ऐसे में एसआईटी की मानें तो जिन चार काश्तकारों ने 164 के कलमबंद बयान दर्ज कराए हैं, उन्हें ही एसआईटी सरकारी गवाह बनाएगी, शेष किसानों को एसआईटी मुल्जिम बना सकती है। चाहे उनके द्वारा मुुआवजे की आधे से अधिक रकम लौटा दी गई हो। 

ईडी की कार्रवाई से भी नहीं बचेंगे मुआवजा हड़पने वाले 
भूमि मुआवजा घोटाले में अब तक 22 लोगों को जेल भेजा जा चुका है, जिनमें कुछ काश्तकार, सरकारी अफसर, बिल्डर और बिचौलिये शामिल हैं। इन सभी के जेल में सजा काटने के बाद भी इन्हें प्रवर्तन निदेेेशालय की कार्रवाई से गुजरना होगा। गलत ढंग से मुआवजा लेने वालों के साथ ही मनी ट्रेल में शामिल लोगों की सूची एसआईटी ने ईडी को सौंपी है। ईडी इसमें अलग से जांच कर सरकारी धन की रिकवरी के लिए इनकी संपत्ति भी जब्त कर सकता है।
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