केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने पांच सौ करोड़ से ज्यादा के एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले की सीबीआई जांच से इनकार कर दिया है। डीओपीटी ने राज्य के गृह विभाग को भेज पत्र में कहा है कि इस मामले की सीबीआई जांच की आवश्यकता नहीं है। डीओपीटी के इस पत्र के साथ सीबीआई जांच को लेकर सभी प्रकार के संशय समाप्त हो गए हैं।
बीते वर्ष मार्च में तत्कालीन कमिश्नर डी. सेंथिल पांडियन ने एनएच-74 के चौड़ीकरण में हुए अरबों के मुआवजा घोटाले का खुलासा किया था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में घपले से जुड़े तमाम तथ्य पेश किए थे। साथ ही उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश भी की थी। इसी दौरान भाजपा की सरकार में मुख्यमंत्री बने त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करते हुए मामले की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश भी कर दी थी। इस पूरे घटनाक्रम में ट्विस्ट तब आया जब सप्ताह भर बाद ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश रद्द करने को कहा। ऐसा न करने पर उत्तराखंड में चल रहे एनएच प्रोजेक्ट के प्रभावित होने तक की बात उन्होंने कह डाली।
इस पत्र के बाद तो राज्य में सियासी तूफान आ गया। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विधानसभा में मोर्चा खोल दिया, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने जांच सीबीआई द्वारा ही कराए जाने की घोषणा की। सीबीआई द्वारा जांच स्वीकार किए जाने तक राज्य में एसआईटी का गठन किया गया, जिसने तमाम अफसरों को गिरफ्तार भी कर लिया। इसी बीच डीओपीटी ने राज्य सरकार के गृह विभाग को पत्र लिखकर मामले में सीबीआई जांच की आवश्यकता से ही इनकार कर दिया है। यह पत्र गृह विभाग के आला अफसरों से गुजरते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। सूत्रों की मानें तो अब मामले में सीबीआई जांच संबंधी कार्रवाई का पटाक्षेप हो गया है।
एनएच-74 घोटाले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने अपने स्तर से जांच की है। कई आरोपी जेल में हैं और तमाम खातेदारों ने मुआवजे में लिया अतिरिक्त पैसा भी वापस करना शुरू कर दिया है। कई मामलों में कोर्ट में अभियोजन भी दाखिल किया गया है। सीबीआई जांच कराना या फिर न कराने का निर्णय डीओपीटी के हाथ में होता है। उन्होंने पत्र भेजकर मामले में सीबीआई जांच की आवश्यकता से इनकार किया है।