ऊधमसिंह नगर जिले में एनएच चौड़ीकरण के मामले में भाजपा सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल होता नहीं दिख रहा है।
इस मामले में कुमाऊं कमिश्नर की जांच में उजागर हुआ 300 करोड़ रुपये के भूमि मुआवजा घोटाले पर पर्दा पड़ने लगा है। सीबीआई जांच के इंतजार में घोटाले के अभिलेख कुमाऊं कमिश्नर के आदेश पर कोषागार के डबल लॉक में बंद है।
चर्चा है कि सियासी दबाव में घोटाले की जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। वहीं डीएम को स्थानीय स्तर पर दोषियों पर कार्रवाई के लिए डबल लॉक से फाइलें बाहर आने का इंतजार है।
एनएच-74, एनएच-125 के भूमि मुआवजा घोटाले में कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन ने अपनी जांच में छह पीसीएस अधिकारियों को दोषी माना था और उनके खिलाफ कार्रवाई को शासन को लिखा था और वर्तमान में छह पीसीएस अधिकारी निलंबित भी चल रहे हैं, लेकिन इसमें कई और लिप्त राजपत्रित अधिकारी और पटवारियों पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी
सीबीअाई रेड
भाजपा सरकार ने इसकी जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी, लेकिन कहा जा रहा है कि सियासी दबाव में इस महाघोटाले की सीबीआई जांच नहीं हो रही है। इसमें खास बात यह है कि डीएम ने भी अपने स्तर की जांच में जिले के तीन नायब तहसीलदारों को भी दोषी पाया गया था, जिनके निलंबन के लिए डीएम ने शासन को पत्रावली भेजी थी, लेकिन हैरानी की बात है कि वह पूरी पत्रावली ही दबा दी गई है।
उधर इस बारे में डीएम डॉ. नीरज खैरवाल का कहना है कि स्थानीय स्तर पर जांच के लिए तभी संभव होगा जब फाइलें कोषागार के डबल लॉक से बाहर आएंगी। फाइलों का गहन अध्ययन करने बाद ही दोषी के खिलाफ जिला प्रशासन स्तर पर कार्रवाई की जा सकेगी।
एक पीसीएस अफसर पर मेहरबानी
एनएच-74 के भूमि मुआवजा घोटालें में जिले के एक पीसीएस अफसर की भूमिका सबसे ज्यादा अहम रही है, लेकिन तत्कालीन सरकार में भी सत्ता तक उक्त पीसीएस अधिकारी की पकड़ काफी मजबूत रही और वर्तमान में भी वह सत्ता के गलियारों में अपनी हनक बनाए हुए हैं। इसीलिए कुमाऊं कमिश्नर की अनुपूरक रिपोर्ट में भी उक्त पीसीएस अधिकारी के निलंबन के लिए शासन को भेजा गया, लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई। उक्त पीसीएस अधिकारी पर गदरपुर, बाजपुर क्षेत्र में भारी हेरफेर का मामला प्रकाश में आया था।
यहां हो रही लीपापोती
1. एनएच-74 और एनएच 125 के भूमि मुआवजा घोटाले में ऊधमसिंह नगर जिले के करीब 24 राजपत्रित अधिकारियों के निलंबन की कवायद तो हुई, लेकिन दबा दी गई।
2. सितारगंज क्षेत्र में पटवारियों की कृषि रिपोर्ट पर भी दिया गया अकृषि का मुआवजा। इसमें विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय से कई ऐसी फाइलों पर सीधे मुआवजा दिया गया, जिन पर पटवारियों की रिपोर्ट भी नही लगी है।
3. कॉमर्शियल और आवासीय भवन के मुआवजे में भी करोड़ों के खेल में कई लोग सफेदपोश की आड़ ले रहे हैं, यह भी मामला दब गया।
4. एनएच-74 के मुआवजा घोटाले का मामला वर्ष 2015-16 में ही पकड़ में आ गया था, इसे भी पूरी तरह से दबाने के प्रयास किए गए।