याचियों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर तो चारधाम हाईवे परियोजना के कामकाज का बोर्ड लगा है, लेकिन परियोजना निर्माण की मंजूरी वाले दस्तावेजों में ऐसा कुछ नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 12 हजार करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी चारधाम हाईवे परियोजना कुल 900 किलोमीटर की है। अब तक वन क्षेत्र में 356 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण का काम किया जा चुका है, जिसके लिए 25,303 पेड़ काटे जा चुके हैं।
अभी 544 किलोमीटर हाईवे का निर्माण शेष है। ऐसे में आगे और पेड़ों की कटाई होगी। वनों को नुकसान होगा। जबकि इतनी बड़ी परियोजना के लिए सिर्फ वन मंजूरी नाकाफी है। पर्यावरणीय मानकों और नियमों से बचने के लिए छोटे-छोटे टुकड़ों में सड़कों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। जबकि 100 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी की सड़क परियोजना में वन मंजूरी के अलावा पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन और पर्यावरण मंजूरी की जरूरत होती है।
याचिका के मुताबिक चारधाम परियोजना में ऋषिकेश से धरासू (एनएच 94), धरासु से यमुनोत्री, धरासु से गंगोत्री, ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग, रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड (केदारनाथ), रुद्रप्रयाग से माना गांव (बद्रीनाथ), टनकपुर से पिथौरागढ़ तक विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण करना है और उन्हें जोड़ा जाना है। मालूम हो कि 28 फरवरी को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने इस परियोजना पर काम रोकने का मौखिक आदेश जारी किया था।