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टिहरी गढ़वाल में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर NGT का नोटिस

Tue, 13 Dec 2016 12:59 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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पेड़ों की कटाई - फोटो : demo pic
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में नरेंद्रनगर के पट्टी धमन्सु इलाके में मौजूद निजी वन क्षेत्र में पेड़ काटे जाने और अन्य निर्माण गतिविधियों के मामले पर नोटिस जारी किया है। नोटिस में ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण मंत्रालय, उत्तराखंड सरकार और निजी वन क्षेत्र के मालिक और अन्य प्राधिकरणों से जवाब मांगा है।
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ट्रिब्यूनल में दायर याचिका में याची ने आरोप लगाया है कि हिमालय के उपजाऊ इलाके में करीब 16 हजार हेक्टेयर में फैले निजी वन क्षेत्र में आदेश का उल्लंघन कर पेड़ काटा जा रहा है। इससे न सिर्फ हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को नुकसान पहुंचेगा बल्कि पर्यावरण कानूनों का भी यह खुला उल्लंघन है।

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची चंद्रप्रकाश बुडाकोटी की याचिका पर संबंधित प्राधिकरणों से जनवरी तक जवाब मांगा है।

जेसीबी जैसा भारी मशीनों का हो रहा इस्तेमाल

NGT
याची का आरोप है कि पट्टी धमंसु स्थित खाता संख्या 2 में खसरा नंबर 512 और 514 मौजूद हैं। जिनका क्षेत्रफल क्रमश: 7156 और 9718 हेक्टेयर है। वहीं राजस्व रिकॉर्ड में हिमालयी उपजाऊ क्षेत्र में आने वाली यह जमीनें निजी वन क्षेत्र के तौर पर दर्ज हैं।

पेड़ काटे जाने व अन्य गतिविधियों में महानंद शर्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, वेस्टिन ग्रुप ऑफ होटल्स, परियोजना प्रबंधक धर्मपाल, वीकेजे प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

इस इलाके में पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन कर न सिर्फ इनके जरिए जेसीबी व अन्य मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है बल्कि निर्माण गतिविधि के जरिए हिमालय की पारिस्थितिकी को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
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एक हजार से अधिक पेड़ काट डाले

1000 पेड़ काट डाले गए - फोटो : demo pic
याची का आरोप है कि इस खसरा संख्या के इर्द-गिर्द की जमीनें भी हरित क्षेत्र हैं। वहीं ठेकेदारों के जरिए इलाके में अब तक एक हजार से अधिक पेड़ काटे गए हैं। वहीं केंद्रीय प्रावधानों के मुताबिक इस इलाके में पेड़ काटने या अन्य गतिविधियों के लिए परियोजना प्रस्तावकों के पास किसी तरह की मंजूरी नहीं है।

याची ने एनजीटी से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से इन इलाकों में पेड़ काटने की गतिविधि पर रोक लगनी चाहिए। साथ ही इस काम में संलिप्त सभी लोगों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। फिलहाल एनजीटी ने इस मामले में केंद्र व राज्य प्राधिकरणों समेत निजी वन क्षेत्र के मालिकों को नोटिस देकर जवाब दाखिल करने को कहा है।
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