गंगा तट पर अब मनमाने ढंग से मठ और आश्रमों का निर्माण नहीं किया जा सकेगा। इसके साथ ही अन्य आयोजनों पर भी रोक रहेगी। गंगा तट पर निर्धारित सीमा के भीतर कैंपिंग भी नहीं हो पाएगी।
धार्मिक मेलों के आयोजन और अन्य निर्माण के लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेश का पालन करना पड़ेगा। एनजीटी के आदेश के अनुपालन पर कैबिनेट की मोहर लगने के बाद शासन इसे लागू कराने की तैयारी में जुट गया है।
एनजीटी के आदेश के अनुपालन में शासन के प्रस्ताव में गंगा की मुख्य धारा से 100 मीटर तक के क्षेत्र को प्रतिबंधित घोषित किया गया है। इस दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक है।
प्रतिबंधित क्षेत्र के आगे दो सौ मीटर तक के पर्वतीय क्षेत्र को रेग्युलेटरी जोन घोषित कर दिया गया है। पर्वतीय क्षेत्र में जहां दोनों तरफ पहाड़ हैं, वहां प्रतिबंधित और रेग्युलेटरी जोन को निर्धारित किया जाना है।
यह तय कर दिया गया है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में नव निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसमें सिर्फ पौधारोपण, तटबंध, तटीय विकास, स्नान घाट निर्माण, बाढ़ प्रबंधन और पुल निर्माण कार्य की अनुमति मिल सकेगी।