देश में विभिन्न कोनों में रहे उत्तराखंडियों की रिश्तेदारी उत्तराखंड के
टूरिज्म को नई दिशा प्रदान करेगी। कैसे जानने के लिए पढ़ें...
टिहरी जिले के गांव सत्यो, जमठियाल, सनेगल, भुष्टी और घेना में राणा, मिश्रा, सजवाण, नेगी, कठैतों की भारी बसावट है।
अब इनके यहां बसने, इनकी समूचे देश में रिश्तेदारी और इनके नस्लीय संबंधों का पता लगाकर उन्हें यहां लाया जाएगा। इस नए प्रयास को नाम दिया जा रहा है जीनियोलॉजी टूरिज्म। इसके साथ ही इसको इको व दूसरे तरह केपर्यटन से भी जोड़ा जाएगा।
टिहरी के जौनपुर में कुछ जुनूनी दीवाने युवा इस अनोखे तरह के पर्यटन व्यवसाय को शुरू कर रहे हैं। यह पूरी तरह से नया कॉन्सेप्ट है। यानी, जीनियोलॉजी को बेस बनाकर नवाचार करने वाले युवा उद्यमी इस नए कॉन्सेप्ट में बड़ा भविष्य देख रहे हैं।
मार्केटिंग में विशेषज्ञता हासिल करने वाले आनंद कुमार, आईआईएम रोहतक के ग्रेजुएट चिन्मय दत्त, शिवम नारायण और कॉमर्स में परास्नातक नमित कुमार मिलकर इस जीनियोलॉजी टूरिज्म की शुरूआत कर रहे हैं। पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर वे जौनपुर क्षेत्र में और उसके बाद अन्य जगहों पर इसे चलाएंगे।
चिन्मय कहते हैं कि टिहरी जिले का जौनपुर क्षेत्र बेहद खूबसूरत है। मालदेवता, कुमाल्डा से ऊपर जाने पर आनंद चौक, सत्यो, फिर उनियाल और आगे कद्दूखाल गांव पड़ता है। यह भौगोलिक तौर पर तो बेहद सुंदर है ही, समुदायों के स्तर पर देखा जाए तो नस्लों, जातियों, समूहों में विभाजित है। इनकी जड़ें राजस्थान, गुजरात, बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्य प्रदेश में हैं।