उत्तर भारत को शीशम और यूकेलिप्टस की नई प्रजातियां इसी महीने मिलेंगी। इन प्रजातियों के गुणों में बदलाव किया गया है, जिससे ये लोगों की आजीविका का और बेहतर संसाधन बन सकें। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते दुष्प्रभावों का सामना करने के लिए ये प्रजातियां और मजबूत होंगी। यूकेलिप्टस के दुष्प्रभावों को कम कर दिया गया है। देहरादून में पहली बार हो रही नेशनल वैरायटी कमेटी की बैठक में इन्हें रिलीज किया जाएगा।
वन उत्पादों को लोगों की आजीविका से जोड़ने और व्यावसाय को बढ़ावा देने संबंधी केंद्र सरकार की मुहिम के मद्देनजर वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) ने शीशम और यूकेलिप्टस की 10-10 नई प्रजातियां तैयार की हैं। इन प्रजातियों को उत्तर भारत की जलवायु को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। प्रजातियों के डीएनए में ऐसा बदलाव किया गया है कि इनकी पुरानी खामियां दूर हों। इनके पुश्तैनी रोगों के खिलाफ इनमें प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के साथ इनकी गुणवत्ता में सुधार किया गया है।
यूकेलिप्टस की कई खामियों में सुधार किया गया है, जिनकी वजह से लोग इसे लगाने में हिचकते हैं। यूकेलिप्टस के संबंध में कहा जाता है कि ये पानी अधिक सोखता है, जिससे देसी वनस्पतियां प्रभावित होती हैं। इस खामी को सुधारा गया है। केंद्र सरकार इन प्रजातियों को उत्तर भारत के राज्यों में लॉंच करेगी। फॉरेस्ट कवर बढ़ाने के साथ ही इनका व्यावसायिक इस्तेमाल हो सकेगा। नई प्रजातियों में आईं बहुत सी खासियतों को अभी गोपनीय रखा गया है।
एफआरआई में 17 फरवरी को होने वाली नेशनल वैरायटी कमेटी की बैठक के बाद खुलासा किया जाएगा। यह पहली बार है कि नई प्रजातियां देहरादून, उत्तराखंड से लॉंच की जाएंगी। अभी तक नई प्रजातियां लॉंच करने के लिए कमेटी की बैठक दिल्ली में ही हुई। महानिदेशक वन एवं पर्यावरण डा. एसएस नेगी ने बैठक और प्रजातियों की लॉंचिंग की पुष्टि की है।