केदारनाथ धाम के लिए अब एक और पैदल मार्ग की खोज की गई है। यूसैक (उत्तराखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर), पीडब्ल्यूडी और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से इस मार्ग का नक्शा तैयार किया है।
सोमवार को यह नक्शा प्रदेश सरकार को सौंपा जा सकता है। यह मार्ग पूर्व में सेना और उत्तरकाशी के नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की ओर से सुझाए गए मार्ग से अलग है।
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इस नए मार्ग को नदी से दूर रखा गया है। यह भी ध्यान रखा गया है कि मार्ग में लैंडस्लाइड जोन कम से कम हों। गौरकुंड से केदारनाथ वाले पुराने रूट में कई भू स्खलन वाले क्षेत्र थे और यह रूट मंदाकिनी के किनारे-किनारे आगे बढ़ता था। अब नए रूट को नदी से दूर रखा गया है और इसमें एक सुरंग का प्रस्ताव भी है।
यूसैक फिलहाल इस रूट की जानकारी नहीं दे रहा है पर इतना जरूर कहा जा रहा है कि इस रूट में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही यह भी ध्यान रखा गया है कि रूट पर कहीं भी बहुत ज्यादा ढाल न हो। इसमें पर्याप्त पड़ाव हों और सभी पड़ाव भू स्खलन और बाढ़ की दृष्टि से सुरक्षित हों।
नया रूट मैप एक-दो दिन में सरकार को सौंप दिया जाएगा। इस रूट को तैयार करने में कन्टूर मैप (रेखाओं के जरिये ऊंचाई को दर्शाने वाला नक्शा) और सेटेलाइट इमेजरी और भौतिक सत्यापन का सहारा लिया गया है। साथ ही पड़ावों के बीच में भी वैकल्पिक मार्ग सुझाए गए हैं। साथ ही रूट के फायदे और नुकसान भी गिनाए गए है। इससे सरकार को नया पैदल मार्ग चयन करने में सहूलियत होगी और खतरों को कम किए जाने के लिए योजना भी बनाई जा सकती है।
- डा. एमएम किमोठी, निदेशक यूसैक
सेना ने सुझाया पैदल मार्ग
सोनप्रयाग से शुरू होकर यह रूट गोमकारा, विष्णुगिरी से होते हुए केदारनाथ पहुंचता है। यह रूट करीब बीस किलोमीटर का है और यह नदी के किनारे नहीं है। इस रूट से रामबाड़ा, जंगलचट्टी नहीं दिखेगा और इसमें गोमकारा में एक पड़ाव भी बनाया गया है।
निम ने भी सुझाया था मार्ग
केदारनाथ के लिए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) ने जो पैदल मार्ग सुझाया था, वह कालीमठ से शुरू होता है। इस रूट पर भी एक पड़ाव है। इस रूट की आलोचना इस बात को लेकर की गई कि इस रूट का उपयोग सिर्फ प्रशिक्षित पर्वतारोही ही कर सकते हैं। सामान्य यात्री के लिए इस पैदल मार्ग का उपयोग करना संभव नहीं है।
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