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पढ़िए, उत्तराखंड के पहले साइबर थाने की कार्यप्रणाली

Fri, 23 Jan 2015 11:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड का पहला साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन फिलहाल ऑनलाइन अपराधों से संबंधित पुराने मामलों को हाथ नहीं लगाएगा। इस थाने में अभी सिर्फ नए मामलों की शिकायत ही दर्ज की जाएगी। थाने के लिए संसाधन जुटाने की कवायद भी शुरू हो गई है।
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बृहस्पतिवार को थाने में 32 पुलिसकर्मियों के पद सृजित कर दिए गए। वैसे थाना 15 से 20 दिन बाद ही पूरी तरह अस्तित्व में आ पाएगा। इस थाने की अगुवाई स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सदानंद दाते करेंगे।

थाने के लिए पुलिस कंट्रोल के पुराने भवन के एक हिस्से जगह उपलब्ध कराई गई है। थाने के लिए सृजित किए गए पदों में तीन निरीक्षक, छह उप निरीक्षक, छह मुख्य आरक्षी, 12 आरक्षी के अलावा चतुर्थ श्रेणी और सफाई कर्मचारी शामिल हैं। एक दो-दिन में पुलिस कर्मियों की तैनाती होने की उम्मीद है। पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने एसटीएफ एसएसपी के साथ नए थाने को लेकर मंथन किया। एसएसपी से थाने के लिए फर्नीचर आदि जरूरी संसाधनों के लिए प्रस्ताव देने के लिए कहा गया है।
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साइबर क्राइम थाने का शुभारंभ नई शिकायतों से होगा। मैन पावर की कमी को देखते हुए फिलहाल थानों से पुराने मामले ट्रांसफर न किए जाने का अनुरोध किया गया है। 15-20 दिन में थाना पूरी तरह काम करना शुरू कर देगा।
-सदानंद दाते, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्पेशल टास्क फोर्स
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इस नंबर पर करें शिकायत

साइबर क्राइम से जुड़ी शिकायतों के लिए बृहस्पतिवार को एसटीएफ ने फोन नंबर जारी किया। नया थाना शुरू होने तक इस नंबर पर या एसटीएफ आफिस जाकर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
यहां करें शिकायत : 0135, 2651689

सैकड़ों शिकायतें, मुकदमे सिर्फ 32
वैसे तो साइबर क्राइम से जुड़ी शिकायतों का अंबार है, लेकिन 2014 में आईटी एक्ट से जुड़े 32 मामले जिले भर के थानों में दर्ज किए गए। अकेले साइबर सेल में करीब 350 शिकायत पहुंची। इनमें फेसबुक और ई-मेल अकाउंट से छेड़छाड़ और हैक करने के मामले ज्यादा हैं।

ऑनलाइन शापिंग, बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी और बैंक अधिकारी बताकर खातों से रकम निकालने की करीब 72 शिकायतें हैं। कई मामलों की जांच थानों से एसटीएफ को ट्रांसफर की गई थी, लेकिन एसटीएफ के पास इसका कोई रिकार्ड नहीं हैं। इस साल डालनवाला कोतवाली में सिर्फ एक ही मुकदमा दर्ज हुआ है, जिसमें मुंबई के कारोबारी के खिलाफ उसकी पत्नी ने ईमेल अकाउंट हैक करने का आरोप लगाया है।

एक भी महिला इंस्पेक्टर नहीं
देहरादून जिले में इस समय एक भी महिला इंस्पेक्टर नहीं है। जिले में तैनात रहीं एकमात्र महिला इंस्पेक्टर अंशु चौधरी प्रोन्नति पाकर पुलिस उपाधीक्षक बन चुकी हैं। महिलाओं से जुड़े साइबर क्राइम के मामलों की जांच महिला इंस्पेक्टर ही कर सकती है। ऐसे में कई मामलों की जांच ठंडे बस्ते में पड़ी है।

सबसे पीछे उत्तराखंड पुलिस
साइबर क्राइम स्टेशन खोलने में उत्तराखंड पुलिस सबसे पीछे रही। देश में साइबर क्राइम का पहला थाना बैंगलोर में 30 सितंबर 2001 को खुला था।

पुलिसकर्मियों को मिलेगा प्रशिक्षण
साइबर क्राइम की बारीकियों को समझाने के लिए पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। पहले चरण में 150 पुलिसकर्मियों को 6 फरवरी को प्रशिक्षित किया जाएगा। एसटीएफ के एसएसपी सदानंद दाते ने बताया कि दिल्ली की एक कंपनी से दो साल का अनुबंध किया गया है।

यह रही बड़ी उपलब्धि
बीते साल साइबर क्राइम में नाइजीरियन जालसाज की गिरफ्तारी एसटीएफ के लिए बड़ी उपलब्धि रही। उसने ओएनजीसी अधिकारी की पत्नी से डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी की थी। आरोपी फेसबुक के जरिये महिला के संपर्क में आया था। उसने मोटे मुनाफे का लालच देकर महिला से डेढ़ करोड़ रुपये अपने बैंक खातों में जमा कराए थे।
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