चकराता वन प्रभाग में बेशकीमती लकड़ी की तस्करी पर रोक नहीं लग पा रही है। आरोपी वन विभाग से एक कदम आगे चल रहे हैं। पहले देवदार के पेड़ों की तस्करी होती थी। उसके बाद लकड़ी के स्लीपर बनाकर तस्करी की जाने लगी। अब सीधा ठेका लेकर प्रतिबंधित लकड़ी से माल बनाकर आपूर्ति की जा रही है।
चकराता क्षेत्र में बेशकीमती प्रतिबंधित लकड़ी की तस्करी का तरीका हाईटेक हो गया है। पहले तस्कर पेड़ों की अवैध कटान कर उनके मोटे तने व टहनियों को वाहनों से तस्करी कर ले जाते थे। उसके बाद इलेक्ट्रिक आरियां और अन्य आधुनिक औजार आए तो पेड़ों को काटकर लकड़ी के स्लीपर बनाने शुरू कर दिए गए। तस्करी का यह तरीका काफी लंबे समय तक ट्रेंड में रहा। अब सीधा तख्त और फ्रेम तैयार हो रहे हैं।
कालसी में प्रतिबंधित प्रजाति के देवदार तथा कैल की लकड़ी को तख्तों और फ्रेम के रूप में बस की सीट के बीच पैकेट बनाकर उसमें छिपाकर ले जाया जा रहा था। तस्करी का यह नया तरीका देख वन विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं। डीएफओ अभिमन्यु ने बताया कि रेंज अधिकारियों को और अधिक सर्तकता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। खासकर वन क्षेत्र में गश्त और चेेकिंग बढ़ाने के लिए कहा गया है। बैरियर पर भी जांच को बढ़ाने के लिए निर्देशित किया गया है।