फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदले मायने, नए जमाने में 'यूज एंड थ्रो' हुआ प्यार

Sun, 14 Feb 2016 04:52 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
‘सॉरी दुनिया से दूर हो जाऊं, तेरी आंखों का नूर हो जाऊं, तेरी राधा बनूं न बनूं, तेरी मीरा जरूर हो जाऊं’... कवियित्री सरिता शर्मा की ये पंक्तियां वाई जनरेशन (आज के युवा) के लिए जरूर बाउंसर हो जाएंगी।
विज्ञापन


नूर-राधा-मीरा से दूर आज की जनरेशन सेक्स, सेंसेक्स, मॉल, मोबाइल के फेर में उलझी है। तमाम युवाओं का लब अब ‘यूज एंड थ्रो’ हो गया है।

प्यार के मामले में ‘एक्सप्रेसिव एग्रेसिव’ हो चुकी नई पीढ़ी ने प्रेम के मायनों को बदल दिया है। 90 के दशक से पहले जहां प्रेम में समर्पण, विश्वास, आस्था, सब्र था, आज का प्यार दिखावटी, हिंसात्मक, क्षणभंगूर और भटकावपूर्ण ज्यादा हो गया है। यह तथ्य समाज पर बारीकी से नज़र रखने वाले समाजशास्त्रियों के हैं।
Trending Videos

इजहार-ए-मुहब्बत

इजहार-ए-मुहब्बत या एक्सप्रेशन ऑफ लव में भी बीते सालों में काफी बदलाव आया है। समाजशास्त्री डॉ. एन रावत ने बताया कि मौजूदा समय में एक्सप्रेशन लाउड हो गया है।

90 के दशक में पहले जहां नजर मिलते प्रेम होता था, धीरे-धीरे बातों का सिलसिला आगे बढ़ता था, प्रेम का दृष्टिकोण काफी वृहद हो गया है।

अब फेसबुक पर प्रपोज करना, ग्रुप में, सबके सामने घुटनों पर बैठकर प्रपोज करना स्टेटस सिंबल माना जाने लगा है। खास बात तो यह है कि पहले प्रेम के नाम पर शरमा जाने वाली लड़किया अब सामने आकर खुद प्रपोज करती हैं।

प्यार का बाजारीकरण
डॉ. नवीन कहते हैं कि बाजार प्रबल होने से मानवीय संबंध परिधि में और बाजार केंद्र में आ गया। बाजार ने छलावा प्रेम को बढ़ावा दिया है। वैलेंटाइन को भुनाने के लिए उसके साथ अन्य दिनों के गिफ्ट भी बाजार में उतारे गए हैं।
विज्ञापन

कैसे बदला प्रेम

समाजशास्त्री डॉ. प्रदीप कहते हैं कि 1947 से 1990 तक का प्रेम सामाजिक बाधाओं से बंधा, प्रतीकात्मकता से पूर्ण था। फिल्मों में भी प्रेम को फूलों, चिड़ियों के जरिए दर्शाया जाता था। फूल वाले कपड़े पहने अभिनेत्रियां पर्दे पर आती थीं।

प्रेम में छलावा नहीं था लेकिन ग्लोबलाइजेशन ने समाज को पूरी तरह से बदल दिया। आईटी सेक्टर में आए बूम के कारण तेजी से मूल्यों में बदलाव आया। मोबाइल, इंटरनेट, सोशल नेटवर्किंग साइट्स, एप्लीकेशन ने जहां सहूलियतें दी, वहां तेजी से मूल्यों में गिरावट का कारण भी बना।

90 के दशक से पहले जहां यदा कदा प्रेम की दीवानगी में हत्या के मामले सुनाई पड़ते थे, अब इनमें तेजी से इजाफा हुआ। बदलते समाज में सिनेमा भी बदला, फूलों और चिड़ियों के माध्यम से दिखाया जाने वाला प्यार अब साक्षात रूप में सामने है। पोर्न स्टार्स को रुपहले पर्दे पर उतार दिया गया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें