हरीश रावत ने प्रदेश में दिव्यांग नीति बनाने की घोषणा की थी।
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प्रदेश को दिव्यांगों के लिए नई नीति जल्दी ही मिल जाएगी। शासन ने नीति बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। इस नीति के बन जाने से प्रदेश के 65 हजार से अधिक दिव्यांगों के मसले हल होने में आसानी हो जाएगी। नीति में दिव्यांगों पर काम करने वाले स्वयं सेवी संगठनों को दिए जाने वाले अनुदान के नियम-कायदे तय हो जाएंगे। कुछ महीनों में दिव्यांग नीति के ड्राफ्ट को फाइनल टच दे दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश में दिव्यांग नीति बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद इसका प्रस्ताव कैबिनेट में लाया गया। इसे मंजूरी मिलने के बाद नीति का खाका तैयार कर लिया गया है। इसे अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है। इससे प्रदेश के दिव्यांगों की बहुत सी सहूलियतों में इजाफा हो जाएगा।
इस वक्त प्रदेश में 65 हजार दिव्यांग पेंशन पा रहे हैं। कुछ अभी भी इसके लाभ से वंचित हैं। दिव्यांग नीति में केंद्र और प्रदेश की बहुत सी कल्याणकारी योजनाओं के बिंदुओं को भी शामिल किया जा रहा है।
दिया जाएगा प्रशिक्षण
इस नीति में आरक्षण के विभिन्न बिंदुओं को शामिल किया गया है। इसके साथ दिव्यांग पेंशन, दिव्यांग प्रमाण पत्र के सरलीकरण, दिव्यांग उपकरणों की उपलब्धता पर फोकस रहेगा। दिव्यांगों के लिए आईटीआई खोलने का मसला भी इसी नीति के तहत आएगा। इसके लिए नीति में अलग नियम-कायदे बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही दिव्यांगों के प्रशिक्षण के मामले को भी शामिल किया गया है। अपर सचिव समाज कल्याण मनोज चंद्रन ने बताया कि राज्य दिव्यांग नीति अनुदान आधारिक रहेगी।