धारचूला के पास बलुवाकोट में एक नवजात बच्ची को फेंकने की शर्मनाक घटना सामने आई है। लगभग छह-सात दिन की यह बच्ची बाजार में एक मकान के पीछे ऐसी हालत में पड़ी मिली कि देखने वालों का दिल पसीज गया।
पुलिस ने धारचूला सीएचसी में चिकित्सीय परीक्षण के बाद बच्ची को एक संस्था के संरक्षण में दे दिया है। शुक्रवार को नवजात को मुख्यालय स्थित चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी लाया जाएगा।
बृहस्पतिवार सुबह छह बजे बलुवाकोट बाजार से सटे रिहायशी इलाके में बच्ची के रोने की आवाज आई। सबसे पहले जीवन सिंह सोनाल से बच्ची को देखा। नवजात दीवान सिंह के मकान के पीछे लावारिस हालत में पड़ी थी। उसे कंबल में लपेटा गया था।
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देर रात दो बजे बच्ची के रोने की आवाज सुनी
नवजात के मिलने की सूचना पर मौके पर भीड़ जुट गई। आसपास के लोगों ने बताया कि उन्होंने देर रात दो बजे बच्ची के रोने की आवाज सुनी थी।
बच्ची चार घंटों तक खुले में लावारिस पड़ी रही। मौके पर मुस्कान सामाजिक उत्थान समिति, अर्पण संस्था, परिवर्तन समिति समेत कई संस्थाओं के कार्यकर्ता भी पहुंचे। इस बीच, सूचना पर पहुंची पुलिस ने नवजात को कब्जे में ले लिया। इसके बाद बच्ची को धारचूला सीएचसी में भर्ती कराया गया।
थानाध्यक्ष महेश चंद्र ने बताया कि चिकित्सीय परीक्षण के बाद बच्ची को वरदान संस्था की सुमन वर्मा को सौंप दिया गया है। नवजात को शुक्रवार को पिथौरागढ़ स्थित घनश्याम ओली चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी में लाया जाएगा।
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गर्भवती महिलाओं का ब्योरा जुटा रही पुलिस
प्रारंभिक चरण में पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में लोगों पूछताछ की और वह सभी अस्पतालों में प्रसव का ब्योरा खंगाल रही है।
पता लगाया जा रहा है कि पिछले एक हफ्ते में अस्पतालों में कितने प्रसव हुए और वहां बच्चियां किस हाल में है। इसके लिए पुलिस टीम गठित की गई है जो गर्भवती महिलाओं का ब्योरा जुटा रही है। सीओ विमल आचार्य का कहना है कि पुलिस घटना की छानबीन में जुटी है।
मानसिकता और अभियान पर उठे सवाल
बलुवाकोट में मिली नवजात बच्ची करीब छह-सात दिन की है। जन्म के बाद बच्ची को इस तरह फेंके जाने के बाद बेटियों की प्रति लोगों की मानसिकता सामने आई है। वहीं बेटी बचाओ अभियान पर भी सवाल उठने लगे हैं। बता दें कि पिथौरागढ़ कम लिंगानुपात वाले देशभर के दस जिलों में शामिल था। हालांकि प्रशासन का दावा है कि जिले में लिंगानुपात में अब सुधार है।