उत्तराखंड के नगर निगमों के लिए होर्डिंग और अन्य विज्ञापनों की नियमावली को शासन ने अधिसूचित कर दिया है।
मंगलवार को नियमावली में अनुमति के बिना विज्ञापन प्रदर्शित करने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। विज्ञापनों को प्रदर्शित करने के लिए स्थल चयन के लिए और विज्ञापनों की अनुमति के लिए समिति के गठन का प्रावधान किया गया है। होर्डिंग के अलावा पोस्टर, बैनर आदि के लिए भी विज्ञापन की दर तय होगी और चयन समिति को ही दर तय करने का अधिकार दिया गया है।
दून नगर निगम क्षेत्र में ही होर्डिंग और अन्य विज्ञापनों से निगम को करीब छह करोड़ रुपये की आय हो रही है। इतना होने पर माना जा रहा है कि यह राजस्व वसूली बेहद कम है। नियमावली के अभाव में निगम इस कारोबार को नियंत्रित भी नहीं कर पा रहे हैं।
ऐसे में मंगलवार को जारी नियमावली से निगमों को नाखून मिल गए हैं। नियमावली में नगर निगम क्षेत्रों में विज्ञापनों को प्रदर्शित करने के नियम घोषित किए गए हैं। होर्डिंग से लेकर पोस्टर, बैनर, गैस के गुब्बारे आदि तक को इस नियमावली के दायरे में लाया गया है। विज्ञापन के लिए स्थान के चयन से लेकर विज्ञापन की दर निर्धारित करने और विज्ञापन स्थल की नीलामी तक के लिए अलग-अलग समितियों का प्रावधान किया गया है।
विज्ञापन नियमावली में नगर निगम क्षेत्र में कोई भी विज्ञापन प्रदर्शित करने से पूर्व लिखित अनुमति जरूरी होगी। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि विज्ञापन कहां-कहां नहीं लगाए जा सकेंगे। नियमावली का उल्लंघन पाए जाने पर जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है।
शासन का कहना है कि नियमावली के लागू होने से शहरों को होर्डिंग, बैनर, पोस्टर आदि से पटे होने की सूरत से निजात दिलाई जा सकेगी। नियमावली में निजी और सार्वजनिक भवनों की छतों पर विज्ञापन प्रदर्शित करने पर भी रोक लगा दी गई है। प्रदेश में इस समय छह नगर निगम है और यह नियमावली सभी निगमों में प्रभावी होगी।
नियमावली की खास बातें
चयन समिति: नगर आयुक्त-अध्यक्ष, सदस्य-यातायात का प्रभारी राजपत्रित अधिकारी, लोक निर्माण विभाग का अधिशासी अभियंता, अधिशासी अभियंता या सहायक अभियंता नगर निगम, जिलाधिकारी की ओर से नामित प्रतिनिधि, विकास प्राधिकरण का प्रतिनिधि, अपर नगर आयुक्त या उप नगर आयुक्त
आवंटन समिति: नगर आयुक्त-अध्यक्ष, सदस्य-अपर नगर आयुक्त, अधिशासी अभियंता, वित्त सेवा का लेखाधिकारी, सदस्य सचिव-विज्ञापन या विज्ञापन कर अधिकारी
- विज्ञापन कर की दर-प्रति वर्ग मीटर की दर से चयन समिति निर्धारित करेगी।
- निजी और सार्वजनिक भवनों की छतों पर विज्ञापन पूरी तरह से प्रतिबंधित।
- बिना अनुमति के झंडियों का उपयोग करने को प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्लास्टिक की झंडियों का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
- विज्ञापन, जिसकी अनुमति दी गई है, का निरीक्षण साल में एक बार जरूरी होगा।
- नियमावली का उल्लंघन होने पर दस हजार रुपये तक का जुर्माना। दोष सिद्ध होने के बाद उल्लंघन जारी रहने तक प्रत्येक दिन के लिए 500 रुपये अतिरिक्त।
- प्रत्येक विज्ञापन के लिए यूनीक कोड संख्या जारी की जाएगी।
- चयनित स्थल पर पिछले साल के मूल्य और वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर प्रीमियम तय होगा। इसमें विज्ञापन कर को भी शामिल किया जाएगा। नीलामी राज्य अधिप्राप्ति नियमावली के तहत होगी।
- नियमावली में विज्ञापनों की शालीनता पर जोर दिया गया है। अश्लील, घृणा फैलाने वाले, शांति में खलल डालने वाले विज्ञापनों की अनुमति को समाप्त करने का अधिकार नगर आयुक्त को दिया गया है।
- सार्वजनिक रास्तों के किनारे और सार्वजनिक दुकान, प्रतिष्ठान आदि के लिए विज्ञापन की अनुमति दो साल के लिये दी जाएगी।
- छह गुणा तीन मीटर से अधिक और भूतल से 2.5 मीटर कम ऊंचाई पर विज्ञापन को अनुमति नहीं दी जाएगी।