यह जानकर देश की किसी भी संचार कंपनी को आश्चर्य हो सकता है कि अकेले सीमा से सटी धारचूला तहसील में 15 हजार विदेशी कंपनियों के सिम प्रयोग हो रहे हैं। धारचूला नगर में यह संख्या पांच हजार के करीब है।
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BSNL
बीएसएनएल की चौपट सेवाओं के बाद लोगों ने अपनों का हाल जानने के लिए नेपाली सिम का ही सहारा लिया है। आगे के आंकड़े देश के डिजिटल इंडिया अभियान को आईना दिखाने वाले हैं।
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नेपाल सीमा पर कांबिंग करते एसएसबी के जवान।
- फोटो : अमर उजाला
जौलजीबी से गुंजी तक 120 किमी के दायरे में भारतीय संचार कंपनियों का कोई नेटवर्क नहीं है, लेकिन नेपाल की संचार कंपनियों के सिम गर्ब्यांग, गुंजी, नपलच्यू, कालापानी और व्यास घाटी में धड़ल्ले से चल रहे हैं।
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mobile
देश डिजिटल इंडिया की तरफ बढ़ रहा है और सीमांत के लोग दूसरे देश की संचार कंपनियों पर निर्भर हैं। गांव के लोगों का कहना है कि सरकार की उदासीनता के कारण ही यह स्थिति सामने आई है।
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mobile
व्यापार संघ के अध्यक्ष भूपेंद्र थापा का कहना है कि व्यापारियों के कड़े संघर्ष के बाद वर्ष 2009 में धारचूला नगर को बीएसएनएल की मोबाइल सुविधा दी गई, लेकिन बीएसएनएल के संचार सेवाएं आए दिन बाधित होती रहती हैं।
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Network
दर्जा राज्यमंत्री कैलाश रावत का कहना है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत एवं वन निगम के अध्यक्ष हरीश धामी के प्रयास से शीघ्र ही प्राइवेट कंपनियों के पांच टॉवर लगने जा रहे हैं, जो दिसंबर अंतिम सप्ताह तक अस्तित्व में आ जाएंगे। इसे आगे भी दारमा, व्यास क्षेत्रों में बढ़ाया जाएगा।
भाजपा नेता महेंद्र बुदियाल का कहना है कि विगत दिनों भाजपा के ओर से प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजु से मिला तथा उन्होंने संचार कंपनियों की आपात बैठक कर सीमांत क्षेत्रों में तेजी से संचार सेवा देने के निर्देश दिए।