प्रधानमंत्री न बनने की टीस आज भी उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के मन में है। उन्हें आज भी इसका मलाल है कि योग्य होने के बावजूद वे प्रधानमंत्री नहीं बन सके।
इस दुर्भाग्य ही कहेंगे कि 1991 में वह नैनीताल-बहेड़ी सीट से चुनाव हार गए। इस दौरान उनके प्रधानमंत्री पद पर पहुंचने के प्रबल आसार थे। पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के सीआरएसटी भ्रमण कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री बनने की इच्छा के सवाल पर उन्होंने कहा कि केंद्र में रहकर उन्होंने विदेश मंत्री, वित्त मंत्री के रूप में सेवा की।
इसके अलावा भी विभिन्न पदों में रहकर प्रदेश व देश सेवा का सौभाग्य मिला, लेकिन कहीं न कहीं उनके अंदर प्रधानमंत्री पद तक न पहुंचने का दर्द दिखा। उन्होंने कहा कि उस दौरान नैनीताल-बहेड़ी सीट से एमपी की दावेदारी से पहले वह दिल्ली गए थे।
जहां फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार ने उनसे यह सवाल किया कि वह फारसी भाषा में आजादी की लड़ाई को क्या कहेंगे।
जिसका उन्होंने सही जवाब दिया।
ऐसे ही कई सवालों के बाद दिलीप जी ने उनकी दावेदारी को प्रबल बताया, लेकिन विपक्षियों ने क्षेत्र में यह कहकर उनके विरोध में प्रचार किया कि दिलीप कुमार यानी मुस्लिम वर्ग के युसुफ मियां ने उनके पक्ष लिया है। यह कुप्रचार ऐसा हुआ कि बहेड़ी गृह क्षेत्र से उन्हें पांच हजार वोट से हार मिली।
इसके बाद देश के प्रधानमंत्री पर पर पीवी नरसिम्हा राव आसीन हुए। पंडित तिवारी ने कहा कि श्री नरसिम्हा राव भाग्यशाली थे कि उन्हें प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला।