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एनडी तिवारी के निधन पर तीन दिन का राजकीय शोक, सीएम ने कहा नहीं भूला जा सकता उनका योगदान

Fri, 19 Oct 2018 09:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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एनडी तिवारी को केक खिलाते रोहित शेखर तिवारी
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पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के निधन पर उत्तराखंड सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया है। पूर्व सीएम के सम्मान में 18 अक्तूबर से अगले तीन दिन तक राजधानी और जिला मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। कोई भी शासकीय मनोरंजन के कार्यक्रम नहीं होंगे। जो कार्यक्रम पहले से तय हैं, उन्हें रद्द घोषित किया जाएगा। 

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री  नारायण दत्त तिवारी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने शोक संदेश में कहा कि उत्तराखंड तिवारी के योगदान को कभी नहीं भुला पाएगा। नवोदित राज्य को आर्थिक और औद्योगिक विकास की रफ्तार से अपने पैरों पर खड़ा करने में तिवारी जी ने अहम भूमिका निभाई। तिवारी जी देश के वित्त मंत्री, उद्योग मंत्री और विदेश मंत्री जैसी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वे सदैव दलगत राजनीति से ऊपर रहे। उन्होंने कहा कि तिवारी जी का निधन मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। सीएम ने उनकी आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों को सांत्वना प्रदान करने की ईश्वर से कामना की।

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राष्ट्र व समाज को अपूरणीय क्षति 

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी जी का निधन राष्ट्र एवं समाज की अपूरणीय क्षति है। तिवारी जी एक लोकप्रिय जन नेता और कुशल प्रशासक थे। दो प्रदेशों के मुख्यमंत्री रहने के साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाया।
- बेबी रानी मौर्य, राज्यपाल

पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी जी का निधन राष्ट्र एवं प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी नवोदित उत्तराखंड के लिए बतौर मुख्यमंत्री विशेष भूमिका रही। दो प्रदेशों के मुख्यमंत्री रहने के अलावा उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई अहम जिम्मेदारियों को सफलता पूर्वक निभाया। 
- अजय भट्ट, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष 

तिवारी जी का जाना एक अपूर्णीय क्षति है। उत्तराखंड उनको हमेशा याद रखेगा। वे विनम्रता की प्रतिमूर्ति थे। विद्वता उनमें कूट-कूट कर भरी थी। जिस पद पर रहे उसे उन्होंने सुशोभित किया। उनका जाना बहुत दुखद समाचार है। यह आशा थी कि वे स्वस्थ होंगे और पहले के अंदाज में लोगों के बीच में आएंगे। दुर्भाग्य से ऐसा न हो सका।
- हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री व महासचिव एआईसीसी

बहुत दुखद घटना है। राजनीति का एक युग खत्म हुआ। इस क्षति की भरपाई कभी संभव नहीं हो पाएगी। उत्तराखंड के लिए यह बहुत बड़ा झटका है। उनका योगदान ये प्रदेश कभी भूल नहीं पाएगा। उन्होंने ही इस प्रदेश के विकास की नींव रखी।
- प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

देश ने एक महान जनसेवक और राष्ट्रभक्त खो दिया। एक युग का अंत हो गया। उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के औद्योगिक विकास की नींव उन्होंने रखी थी। ये इस प्रदेश का सौभाग्य था कि उनके जैसा अनुभवी व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर आया। योजना का उन्होंने जो आकार बनाया और नींव डाली, उसी पर उत्तराखंड का विकास हो रहा है। संकीर्णता से ऊपर उठकर उन्होंने राष्ट्र और समाज की सेवा की।
-विजय बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री

भारत की राजनीति का एक युग समाप्त हुआ। जो विनम्रता और शालीनता का युग था, उसका प्रतिनिधित्व एनडी तिवारी करते थे। राजनीतिक शिष्टाचार क्या होता है, ऐसा कोई नेता था न कभी होगा। उत्तराखंड के लोगों के लिए आज का दिन दुर्भाग्य का है। उत्तराखंड से एक व्यक्ति निकला और विश्व पटल पर छा गया। उन्हें हम लोगों ने प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया। उन्होंने 1991 में चुनाव हरा दिया। उसके लिए हम दोषी हैं।
- किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

तिवारी जी का निधन उत्तराखंड और देश की अपूर्णीय क्षति है। वे भारतीय राजनीति के पुरोधा थे। उन्होंने जीवन पर्यंत समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर कार्य किया। उनके योगदान को यह प्रदेश सदैव याद रखेगा।
- प्रेमचंद अग्रवाल, अध्यक्ष, विधानसभा
 

तिवारी प्रदेश और देश के मूर्धन्य नेता थे। एक सामान्य परिवार में पैदा हुए। राजनीति में उन्होंने अपने विलक्षण व्यक्तित्व की महानता को दिखाया। वे मेरे व्यक्तिगत संरक्षक व मित्र थे। इस प्रदेश के लिए उन्होंने अच्छा काम किया। सबको साथ लेकर चलने की उनमें अद्भुत कला था।
- भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद

मेरे गुरु पथदर्शक, मोटिवेटर और आदर्श थे तिवारी: यशपाल आर्य

एनडी तिवारी के निधन का समाचार मेरे लिए किसी वज्रपात से कम नहीं है। हालांकि, वे लंबे समय से अस्वस्थ और अचेतावस्था में थे और कभी भी इस दु:खद खबर के लिए लोग आशंकित थे ही, लेकिन आज ही...? आज तो उनके जन्म दिवस पर सुबह मैं उनके स्वस्थ होने और दीर्घायु की प्रार्थना कर रहा था। हालांकि, मैं समझ रहा था कि यह संभव हो पाना मुश्किल है। लेकिन,  उनके स्वस्थ होने के बजाय निधन की खबर के बाद मैं अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पा रहा हूं। मुझे अपने राजनैतिक जीवन और उनके साथ व्यतीत किया गया एक-एक लम्हा याद आ गया।

मुझे यह कहने में गर्व है कि मैंने राजनीति का ककहरा भी तिवारी जैसे महान व्यक्ति और एक जीती जागती संस्था जैसे व्यक्तित्व से सीखा। वे मेरे राजनैतिक गुरु, आदर्श, मोटिवेटर, पथदर्शक, संरक्षक और हितैषी रहे। मुझे 1980 का वह वाक्या याद आ रहा है जब लोकसभा चुनाव में एक कार्यकर्ता की हैसियत से मैं हल्द्वानी देवलचौड़ प्राथमिक पाठशाला में बने मतदान केंद्र का बूथ प्रभारी था। इस बूथ से तिवारी जी को बड़ी संख्या में वोट मिले। इस चुनाव में जीत के बाद जब वे हल्द्वानी आए तो उन्होंने सभा में मेरा नाम लेकर बधाई दी और अपने पास बुलाया। यह मेरी उनसे पहली मुलाकात थी। मैं उनके व्यक्तित्व से चमत्कृत था और मुलाकातों का सिलसिला बढ़ता चला गया।  मुझ पर उनका इतना अटूट और अडिग विश्वास रहा कि उन्होंने मुझे लगातार 1989, 91, 93, 96 और 2002 में विधानसभा का टिकट दिलवाया और अपना आशीर्वाद देकर चुनावों में सफलता भी दिलवाई। तिवारीजी में राजनीति में भी स्वस्थ परंपराएं बनाए रखने की कला थी।

उनमें शालीनता, विनम्रता, सबको साथ लेकर चलने और विरोधियों को भी अपना प्रशंसक बना लेने की कला, गरीबों और पिछड़ों की चिंता, दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कार्य करने का गुण था। उनके दरवाजे सबके लिए खुले थे और सभी ने उनसे कुछ न कुछ पाया ही। हर विषय पर उनकी गहरी पकड़ और गहन अध्ययन व जानकारी अचंभित करने वाली होती थी जिससे ब्यूरोक्रेसी में भी उनकी बहुत इज्जत थी। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि उनका निधन मेरे लिए व्यक्तिगत हानि है। उत्तर प्रदेश के विकास विशेषकर नोएडा की स्थापना में तो उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी ही उत्तराखंड की मजबूत बुनियाद भी तिवारी ने ही रखी जिससे उनके बाद आई सरकारों की राह आसान हुई। सभी लोगों को यह स्वीकारने में हिचक नहीं होनी चाहिए।  (डॉ.गिरीश रंजन तिवारी से वार्ता पर आधारित)

वे वस्तुत: उत्तराखंड की विकास धारा के प्राण पुरुष बन गए थे

एक ऐसा युग समाप्त हो गया जो राजनीतिक भेदाभेद से परे समाज में अपनी विनम्रता और अजातशत्रु छवि के लिए जाना जाता था। मैं उनसे तब मिला था जब वे उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री थे- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से भाऊराव देवरस साहित्य समारोह था। उन्होंने उस कार्यक्रम में अनेक कांग्रेसी नेताओं के विरोध के बावजूद आना स्वीकार किया और संघ के श्रद्धेय सर्जक- देवरस जी के बारे में बहुत अच्छा बोले। इससे उनके कांग्रेसीपन में कमी नहीं आई बल्कि उनका कद बढ़ा।  पाञ्चजन्य के संपादक के नाते उनसे तब कई बार मिलना हुआ जब वे कांग्रेस के शिखर नेता और प्रधान मंत्री पद के अधिकारी माने जाते थे, आगंतुक अतिथि का सम्मान करना कोई उनसे सीखे। आजकल तो बड़े नेता होने का अर्थ है कि समय देकर भी आगंतुक अतिथि को एक एक घंटा प्रतीक्षा करवाई जाए।
एक बार तो वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहते हुए नंगे पांव ही मुझे कार के पोर्च तक छोड़ने आए। जब देहरादून में जनजातीय विद्यालय का प्रारंभ करना था तो वे लोकसभा के सदस्य थे और लोक लेखा समिति के अध्यक्ष थे। इस कार्य के लिए मुझे जनरल बीसी खंडूरी जी अपने साथ उनसे मिलवाने और सहायता के लिए प्रार्थना करने संसद के सदन में गए थे। जनरल साहब को देखते ही वे खड़े होकर बोले अरे आपने क्यों कष्ट किया?  मैं विजय जी को अच्छी तरह जानता हूं आप जैसा कहेंगे मैं करूंगा और तुरंत उन्होंने हमारे विद्यालय का संरक्षक होना स्वीकार कर लिया। 
वे वस्तुत:  उत्तराखंड की विकास धारा  के प्राण पुरुष बन गए थे - जो कांग्रेस के प्रबल विरोधी हैं वे भी नारायण दत्त तिवारी जी को पहाड़ का प्रतीक और आधुनिक निर्माता मानते हैं।  गोविन्द वल्लभ पंत और हेमवती नंदन बहुगुणा जी के बाद पहाड़ तिवारी जी की स्मृति की छाया में आगे बढ़ेगा।  उनसे  विनम्रता और विकास के लिए सभी विवाद और विभेद अलग रखना सीख कर ही  प्रदेश का भविष्य बनाया जा सकता है।
- तरुण विजय, पूर्व संपादक पाञ्चजन्य, पूर्व सांसद
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जन्मदिन पर तिवारी जी के निधन की खबर से लगा गहरा आघात : इंदिरा

पंडित नारायण दत्त तिवारी विराट व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी मृत्यु से शून्य सा पैदा हो गया है। तिवारी जी की उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक प्रत्येक गली और सड़क पर छाप मौजूद है। आज दुर्गा नवमी तथा उनके जन्मदिन पर उनके निधन की खबर सुनकर मुझे गहरा आघात पहुंचा है। यह प्रदेश उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों के लिए सदैव उनका ऋणी रहेगा। मैं अपनी शोक श्रद्धांजलि उन्हें अर्पित करती हूं तथा ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि उनके परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें तथा उनकी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में देश का प्रत्येक उद्योगपति उत्तराखंड में उद्योग लगने को आतुर था। टाटा, बजाज, नेस्ले, ब्रिटानिया, अशोक लीलैंड और डाबर आदि बड़े औद्योगिक घरानों ने उनके कार्यकाल में उद्योग स्थापित किए। अस्पताल, शुगर मिल औक क्षेत्र के कई बडे़ कारखाने उनकी याद दिलाते हैं।  व्यक्तिगत बातचीत में वह सदैव ज्ञान अर्जित करने की सीख देते थे। ग्लिम्सेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री तथा डिस्कवरी ऑफ इंडिया जैसी किताबों का अध्ययन करने को प्रेरित करते थे कि इससे पूरे विश्व का ज्ञान आपको मिल जाएगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली छात्र एवं छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में उन्होंने सर्वप्रथम यूनियन जैक उतारकर तिरंगा लहराया था। आर्थिक संसाधन न होने के कारण वह अपने पिता के मित्र से पांच रुपये उधार लेकर इलाहाबाद पहुंच गए और आनंद भवन में रहकर उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय का सफर पूरा किया। स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी की और अशोक मेहता जी के नेतृत्व में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की।
-इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष
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